आजादी का अमृत महोत्सव पर शायरी, स्टेटस और कोट्स

15 अगस्त 2022 को भारत की आजादी के 75 साल पूरे होने जा रहे हैं। इस पावन अवसर पर प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने आजादी के अमृत महोत्सव की शुरुआत की, जो 2023 तक चलेगा।

इस महोत्सव का मुख्य उद्देश्य भारत के जन-जन को यह बात याद दिलाना है कि आजादी दिलाने के लिए स्वतंत्रता सेनानियों को कितने संघर्षों और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था।

साथ ही, इसमें भारत के अबतक के विकास की समीक्षा करना और आने वाली योजनाओं को बढ़ावा देना शामिल है।

देशभक्तों को स्मरण करते हुए हमने कुछ शायरी, शेर, स्टेटस और कोट्स का संग्रह तैयार किया है, जो आपमें देशभक्ति की भावना जगाने में अतिरिक्त मदद करेंगे:

जश्न ए आज़ादी के अमृत महोत्सव का देखो अनुपम उत्सव है।
भारत माता की जयकार का चहुं दिश गूंज रहा जो कलरव है।
आजादी के इस अमृत महोत्सव पर चारो ओर खुशिया छाई है।

आजादी के डगर के हम थे दीवाने।
धरती हमारी माशूका हम थे परवाने।
देश की आन के थे हम सब रखवाले।
दिल के थे साफ सूरत के थे हम काले।

हम सभी ने मिलकर ठाना है
आजादी का अमृत महोत्सव को धूमधाम से मनाना है

बलिदान हुए इस देश के नायक।
आओ मिलकर करें प्रणाम हम।
उनके दिखाएं राह पर चलकर;
करें ज्योतिपुंज का निर्माण हम।।

आजादी का अमृत महोत्सव हम सभी को मिलकर मनाना है
जन जन की भागीदारी से भारत को आत्मनिर्भर बनाना है

आओ हर घर घर तिरंगा पहराए
आजादी के 75वे साल को मनाए
मिलकर सभी आजादी का अमृत महोत्सव मनाए
आजादी का अमृत महोत्सव की शुभकामनाएं

खेलें है हजारों लाल खून की होली,
कितनी ही माताओं की खाली हुई झोली।
अनगिनत सुहागिनों के मिट गई माथे की रोली,
तब सजी भारत माता की आजादी की डोली।

आजादी के इस अमृत महोत्सव पर…
आओ मिलकर करे हमसब संकल्प अब।
नव-भारत के निर्माण को करना होगा “देश-मंथन”
अमृत को खोज कर करना होगा आविष्कार अब।

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दांव पर सब कुछ लगा है, रुक नहीं सकते
टूट सकते हैं मगर हम झुक नहीं सकते!

हर घर फहराएंगे तिरंगा, सब तिरंगे का अभिमान करें!
आजादी के अमृत महोत्सव पर, आओ नए भारत का निर्माण करें!
कुछ कर दिए हमने काम अनोखे, कुछ नये करने का गुमान करें!

मेरा देश, मेरा वतन, मेरा यह चमन,
शांति के, उन्नति के उद्देश्य को नमन।
किसने बदला पथ प्रगति और विकास का,
बदल दिया रुख, धरती और आकाश का।

वतन के जाँ-निसार हैं वतन के काम आएँगे
हम इस ज़मीं को एक रोज़ आसमाँ बनाएँगे

दिलों में हुब्ब-ए-वतन है अगर तो एक रहो
निखारना ये चमन है अगर तो एक रहो

आजादी के पचहत्तरवे वर्ष की खुशी का उत्सव लिख दूंगी मैं
अपनी जुबानी आजादी के
अमृत महोत्सव की अंनत शुभकामनाएं लिख दूंगी मैं
माँ भारती को कर प्रणाम गर्व से “हिंदुस्तानी हूं” कह दूंगी मैं

एक महोत्सव देश के त्याग और बलिदान का
एक महोत्सव देशभक्ति की भावना के अनुराग का
आजादी का अमृत महोत्सव देश की वीरों के बलिदान का

ये कह रही है इशारों में गर्दिश-ए-गर्दूं
कि जल्द हम कोई सख़्त इंक़लाब देखेंगे

हम आजाद हैं, ये आजादी कभी छिनने नहीं देंगे,
तिरंगे की शान को हम कभी मिटने नहीं देंगे,
कोई आँख भी उठाएगा जो हिंदुस्तान की तरफ,
उन आँखों को फिर दुनिया देखने नहीं देंगे।

तिंरगे में लिपटा मै तन चाहता हूँ।
माँ तेरे प्रेम में डूबा मै मन चाहता हूँ।
तेरी ओर जो देखे मै फना कर दूँ उसे।
तेरे लिए लूटाना अपना सर्वस्य चाहता हूँ।

देश के प्रहरी मिलकर पैगाम दे।
तेरे लिए हम झुककर सलाम दे।
मै न रहूं मेरा देश आबाद रहे।
चहूंओर बस इसका ही नाम रहे।

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है

इसी जगह इसी दिन तो हुआ था ये एलान
अँधेरे हार गए ज़िंदाबाद हिन्दोस्तान

बहुत हुआ अपमान आजादी के मतवालों का
उठो, चलो अब शहीदों का सम्मान करो।
गूऺजे क्षितिज पर यशोगान इनका, ऐसा गुणगान करो
आया आज़ादी का अमृत महोत्सव, चलो जश्न मनाओ।

हम अम्न चाहते हैं मगर ज़ुल्म के ख़िलाफ़
गर जंग लाज़मी है तो फिर जंग ही सही

माटी मेरे देश की यदि मस्तक पर लग जाए,
सच कहती हूँ तकदीर बदल जाए।
ये मन बडा चंचल है इसे जितना समझाऊँ
कैसे करूँ तेरी सेवा, सेवा करने को मचल जाए।
एक शहीद दर्जा मिले और तन तिरंगे में लिपट जाए
मेरे जीवन की बगीया फूलों सी महक जाए।
माटी मेरे देश की यदि मस्तक पर लग जाए
सच कहती हूँ मेरे तकदीर बदल जाए।

नक़्शा ले कर हाथ में बच्चा है हैरान
कैसे दीमक खा गई उस का हिन्दोस्तान

शहीदों की मजारों पर लगेंगे हर बरस मेले
वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा

आओ आजादी का अमृत महोत्सव मनाएं
दुखी जन दिखें तो उन्हें दिल से लगाएं
अहिंसा और शांति को घर घर फैलाएं
जन जन को देश का प्रहरी बनाएं
रुकें न कभी, ना ही थक के बैठ जाएं
हम मंजिलों के राही, कहीं न भूल जाएं
ये राहें कठिन हैं, ना पग डगमगाएं
निरंतर बढ़ें आगे, बढ़ते ही जाएं ।
आगे बढ़ते ही जाएं।

लहू वतन के शहीदों का रंग लाया है
उछल रहा है ज़माने में नाम-ए-आज़ादी

अमृत महोत्सव के हैं साक्षी
हम सब वो जो धरा पे हैं।
एक देश है, एक ही तिरंगा
एक संविधान स्वीकारा है।
भाषा वेश हैं भिन्न यहां पर
संस्कृति का अजब नजारा है।
पीया गरल था, अब है अमृत
धारा वो जो बहती हर पल।
मंज़िल बहुत दूर नहीं है अब
वो, सामने दिखा किनारा है।

ऐसे कई दीवाने देखे, जिनको देश प्यारा है
कश्मीर से कन्या कुमारी, सारा देश हमारा है।
अभी तो आगे भी बढ़ना है, संकल्प हमारा न्यारा है
वीरों कस लो कमर कि मां भूमि ने तुम्हें पुकारा है।

कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी
सदियों रहा है दुश्मन दौरे जहां हमारा

आजादी के इस उत्सव को हमें मनाना है,
पर सबसे पहले नवयुवकों को चेताना है।
देश में फैले भ्रष्टाचार, नफरत को मिटाना है
मानव धर्म सबसे बड़ा है सबको ये समझाना है।
नारी से नारायण है इसको सम्मान दिलाना है।

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