कुंडलिनी शक्ति को कैसे जागृत करें?

“कुंडलिनी” एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है “सांप की तरह कुंडली मारना”, और यह एक विशिष्ट प्रकार के ध्यान और योग को संदर्भित करता है, जिसके बारे में माना जाता है कि इसमें के लिए आपकी जागरूकता और आध्यात्म को पूरी तरह से जगाने की क्षमता होती है।

कुंडलिनी शक्ति

कुंडलिनी ध्यान के सिद्धांत के अनुसार, जीवन ऊर्जा आपकी रीढ़ (मूल चक्र) के आधार पर सांप की तरह कुंडलित होती है – और इसी कारण इसका नाम कुंडलिनी पड़ा।

कुंडलिनी ध्यान में, आप इस ऊर्जा को जगा सकते हैं और अभ्यासों के संयोजन के माध्यम से ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। इन अभ्यासों में निम्न शामिल हैं:

  • गहरी सांस लेना
  • मुद्राएं
  • मंत्र
  • शारीरिक हलचल

कहा जाता है कि ये अभ्यास आपके शरीर में निष्क्रिय ऊर्जा को जगाते हैं और इसे आपके चक्रों (ऊर्जा केंद्रों) के साथ तब तक घुमाते हैं जब तक कि यह आपके सिर के सातवें (सहस्त्रार) चक्र पर रिहाई बिंदु तक नहीं पहुंच जाती।

ऊर्जा की यह रिहाई आंतरिक संतुलन, जागृति और ज्ञानोदय को बढ़ावा देती है।

सबसे पहले, कुछ सांस्कृतिक संदर्भ

कुंडलिनी प्रथा कम से कम कुछ हजार साल पुरानी है, हालांकि विद्वानों को इसकी उत्पत्ति के सटीक समय का नहीं पता।

उद्गम

कुंडलिनी शिक्षाएं पहली बार उपनिषद में दिखाई दीं, जो हिंदू धार्मिक ग्रंथों का एक संग्रह है। अनुमान बताते हैं कि इन पवित्र लेखों की रचना लगभग 800 से 500 ई.पू. के आसपास शुरू हुई थी।

यह कुंडलिनी ध्यान का पहला ज्ञात रिकॉर्ड है, लेकिन व्यापक रूप से ऐसा माना जाता है कि कुंडलिनी ध्यान और योग का मौखिक विवरण इससे भी पहले का था।

अपने प्रारंभिक चरण में, कुंडलिनी एक निजी दर्शन था। वे छात्र जिन्होंने ध्यान और अध्यात्म का अध्ययन करते हुए वर्षों बिताए थे, केवल उन्हें ही कुंडलिनी शिक्षकों से सीखने का अवसर मिलता था।

यहां तक ​​कि जब कुंडलिनी केवल की ध्यान की शिक्षाओं से शारीरिक अभ्यास (योग) तक विकसित हो गया, तब भी इसके बारे में केवल चुनिंदा शिक्षकों और छात्रों को ही ज्ञान था।

हजारों वर्षों तक ऐसा ही रहा, जब तक आम योग अभ्यासों में कुंडलिनी योग सिखाना शुरू नहीं हुआ, जिसमें कुंडलिनी ध्यान भी शामिल है।

दुनिया को परिचय

1968 में, योगी भजन (हरभजन सिंह योगी) ने कुंडलिनी योग की शुरुआत करके कुंडलिनी के आसपास के रहस्य को समाप्त कर दिया – जिसमें दुनिया के लिए कुंडलिनी ध्यान एक बड़ा घटक था।

उनका मानना ​​था कि इससे लोगों को एक अलग प्रकार की चेतना का अनुभव करने का अवसर देकर, उनके जीवन और समग्र कल्याण में सुधार करने में मदद मिलेगी।

30 से अधिक वर्षों की अवधि में, उन्होंने हजारों ध्यान और योग तकनीकों को पढ़ाया और कुंडलिनी अनुसंधान संस्थान की स्थापना की, जहां उन्होंने कई छात्रों को इस अभ्यास के शिक्षक बनने के लिए प्रशिक्षित किया।

संभावित लाभ

कुंडलिनी ध्यान का अभ्यास करने वाले लोग कई तरह के लाभों का अनुभव करते हैं। जिसमें शामिल है:

  • माइंडफुलनेस (चेतना) और करुणा में बढ़ोतरी
  • स्वयं के साथ बेहतर संचार
  • प्रेरणा
  • एक स्पष्ट दिमाग
  • स्वयं के बारे में अधिक विकसित ज्ञान
  • अपने कार्यों में बड़ा उद्देश्य और इरादा

कुंडलिनी योग, जिसमें आमतौर पर कुंडलिनी ध्यान शामिल होता है, के कुछ लाभ वैज्ञानिक शोधों द्वारा समर्थित हैं:

  • तनाव में कमी – 2017 में हुए एक छोटे से शोध से पता चलता है कि कुंडलिनी योग तत्काल तनाव से राहत प्रदान कर सकता है। शोधकर्ता कहते हैं कि कुंडलिनी ध्यान उच्च तनाव से जुड़ी स्थितियों के लिए मददगार हो सकता है, जिसमें हृदय रोग और अनिद्रा शामिल हैं।
  • घबराहट में कमी – 2018 के एक शोध से पता चलता है कि कुंडलिनी योग सामान्यीकृत चिंता विकार के लक्षणों जैसे घबराहट को कम कर सकता है।
  • संज्ञानात्मक क्षमता में बेहतरी – 2017 के एक शोध में 81 वृद्ध वयस्कों में संज्ञानात्मक हानि के संभावित उपचार के रूप में कुंडलिनी योग और स्मृति वृद्धि प्रशिक्षण की जाँच की। परिणाम बताते हैं कि जहां दोनों हस्तक्षेप स्मृति को बेहतर बनाने में मदद करते हैं, वहीं कुंडलिनी योग कार्यकारी कामकाज को बेहतर बनाने में भी मदद करता है।

कुंडलिनी शक्ति कैसे जागृत करें?

चुनने के लिए हजारों तकनीकें होने के कारण, कुंडलिनी ध्यान थोड़ा जटिल हो सकता है। इसलिए यदि आप इसका उपयोग किसी निश्चित उद्देश्य को पूरा करने के लिए करना चाहते हैं, तो एक योग शिक्षक विशिष्ट तकनीकों पर मार्गदर्शन प्रदान कर सकता है।

कुंडलिनी ध्यान एक व्यापक दृष्टिकोण है, इसलिए यदि आपने पहले कभी ध्यान नहीं किया है, तो सबसे पहले आपको ध्यान का अभ्यास करना सीखना होगा।

ध्यान और उसके साथ कुंडलिनी अभ्यास करने की एक प्रचलित तकनीक निम्न है:

1. आरामदायक पोशाक पहनें

ध्यान करते समय हल्के, ढीले कपड़े पहनने से आपको अधिक आरामदायक महसूस करने में मदद मिल सकती है।

कुंडलिनी अभ्यासी अक्सर अपने सिर को ढकने के लिए शॉल या अन्य कपड़े का उपयोग करते हैं, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे ऊर्जा प्रवाह की रक्षा करने और उसे बढ़ाने में मदद मिलती है।

2. आम ध्यान मुद्रा में आएं

  • अपनी रीढ़ को सीधा रखते हुए फर्श पर सीधे बैठ जाएँ।
  • अपनी हथेलियों प्रार्थना की मुद्रा में छाती पर रखें।
  • अपनी आँखों को बंद कर लें, लेकिन पूरी तरह से नहीं – प्रकाश की एक छोटी सी दरार अंदर आने दें।

3. तीसरी आँख के चक्र पर ध्यान केंद्रित करें

कई अभ्यासियों को लगता है कि ध्यान करते समय अपनी तीसरी आँख पर ध्यान केंद्रित करना ज्यादा फायदेमंद होता है।

अपनी आंखें बंद रखते हुए, अपने ध्यान को अपनी भौहों के बीच अपने माथे के केंद्र में रखें।

4. मंत्र का उच्चारण करें

मंत्र, जो आपका ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं, कुंडलिनी ध्यान का एक महत्वपूर्ण घटक हैं।

इसमें आमतौर पर संस्कृत भाषा, जो कि एक पवित्र हिंदू भाषा है, में मंत्र होते हैं।

लेकिन अपने शुरुआती अभ्यास में सही मंत्र चुनने के बारे में ज्यादा चिंता न करें। आपको जो भी उच्चारण करने में बेहतर लगता है, उससे शुरुआत करें।

कुंडलिनी योग में इस्तेमाल किये जाने वाले कुछ आम मंत्र निम्न हैं –

  • मूलाधार चक्र – ॐ लं परम तत्वाय गं ॐ फट
  • स्वाधिष्ठान चक्र – ॐ वं वं स्वाधिष्ठान जाग्रय जाग्रय वं वं ॐ फट
  • मणिपुर चक्र – ॐ रं जाग्रनय ह्रीम मणिपुर रं ॐ फट
  • अनाहत चक्र – ॐ यं अनाहत जाग्रय जाग्रय श्रीं ॐ फट
  • विशुद्ध चक्र – ॐ ऐं ह्रीं श्रीं विशुद्धय फट
  • आज्ञा चक्र – ॐ हं क्षं चक्र जगरनाए कलिकाए फट
  • सहस्त्रार चक्र – ॐ ह्रीं सहस्त्रार चक्र जाग्रय जाग्रय ऐं फट

आप इन मंत्रों को जोर से उच्चारित कर सकते हैं या मन में ही दोहरा सकते हैं, जो भी आपको बेहतर लगे।

5. अपनी श्वास पर ध्यान देना शुरू करें

केवल अपनी नाक से ही श्वास को अंदर लें व बाहर छोड़ें, और श्वास लेने की अनुभूति पर ध्यान केंद्रित करें।

फिर, अपनी श्वास को धीमा करना शुरू करें। आपकी प्रत्येक श्वास अंदर लेने बाहर छोड़ने की प्रक्रिया 3 से 4 सेकंड तक चलना चाहिए, इसलिए प्रत्येक पूरी श्वास लगभग 8 सेकंड तक चलनी चाहिए।

इस दौरान इस बात पर ध्यान दें कि कैसे आपकी श्वास अंदर बहती है और आपके शरीर को ऊर्जा प्रदान करती है।

6. मुद्राएं अपनाएं

कुंडलिनी तकनीक में आमतौर पर मुद्रा, या हाथ की स्थिति का उपयोग शामिल होता है।

उदाहरण के लिए, यदि आप ज्ञान, खुलेपन और शांति को बढ़ावा देना चाहते हैं, तो अपनी पहली उंगली को अपने अंगूठे से छूकर ज्ञान मुद्रा में बैठें।

धैर्य और प्रतिबद्धता को बढ़ावा देने के लिए, अपनी मध्यमा उंगली को अपने अंगूठे से छूकर शुनी मुद्रा में बैठें।

7. अपनी श्वास को बराबर भागों में बाँटें

4 सेकंड के लिए एक लंबी श्वास लेने के बाद एक लंबी श्वास छोड़ने के बजाय, प्रत्येक अंदर ले और बाहर छोड़ने की श्वास को चार भागों में विभाजित करें।

दूसरे शब्दों में कहें, बीच-बीच में बिना श्वास बाहर छोड़े हुए 4 भागों में श्वास अंदर लें, हर एक भाग में 1 सेकंड के लिए श्वास रोकें। फिर इसी तरह चार भागों में श्वास बाहर छोड़ें। प्रत्येक श्वास के भाग के साथ, अपनी नाभि (बेली बटन) को अपनी रीढ़ की ओर खींचें।

8. ध्यान भटकने पर दोबारा अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित करें

लंबे समय से ध्यान करने वाले लोग भी हर समय एकाग्र नहीं रह पाते। इसलिए शुरुआत में ध्यान के दौरान आपका ध्यान भटकना आम बात है।

जब भी आपको लगे कि आपका ध्यान भटक रहा है, तो अपने विचारों को वापस अपनी श्वास की ओर मोड़ें।

जबरदस्ती किसी भी ध्यान भटकाने वाले विचार को याद न करने की कोशिश न करें, इससे आपका उस विचार पर ध्यान और अधिक जायेगा। यह उसी तरह है, जैसे मैं आपसे कहूँ कि आप अभी किसी बंदर के बारे में न सोचें, तो आप बंदर के बारे में न सोचने की कोशिश में ही उसे ज्यादा सोचेंगे।

इसलिए यदि कोई भटकने वाला विचार आपके मन मेंआता है, तो उसे स्वीकार करें और फिर अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित करके उसे प्राकृतिक रूप से दूर जाने दें।

9. 3 से 5 मिनट तक जारी रखें

यदि आप ध्यान तकनीक में नए हैं, तो एक लंबे अभ्यास में सीधे कूदने की कोई आवश्यकता नहीं है।

आमतौर पर यह सलाह दी जाती है कि आप एक छोटे सत्र से शुरू करें और जैसे-जैसे आपका अनुभव बढ़ता जाये तो अपने ध्यान की अवधि को भी बढ़ाते जाएँ।

10. ध्यान समाप्त करने का सही तरीका

अपने ध्यान अभ्यास के सत्र को एक गहरी पूर्ण श्वास के साथ पूरा करें।

जब आप अपनी बाहों को उनकी आम अवस्था में लाएं, तब भी एक बार फिर से गहरी श्वास अंदर लें। फिर श्वास बाहर छोड़ते हुए रिलैक्स महसूस करें।

उन दावों के बारे में क्या जो इसे खतरनाक बताते हैं?

लोग अक्सर कुंडलिनी जागरण के रूप में जानी जाने वाली ऊर्जा की रिहाई का अनुभव करने के लिए कुंडलिनी ध्यान का अभ्यास करते हैं। बहुत से लोगों को यह कुछ हद तक एक आध्यात्मिक अनुभव लगता है, लेकिन अगर आप नहीं जानते कि आपको इससे क्या उम्मीद रखनी चाहिए, तो आपको इसको लेकर थोड़ा भारी लग सकता है।

कुंडलिनी जागरण के दौरान, अक्सर लोग कुछ शारीरिक संवेदनाओं का अनुभव करते हैं, जैसे कि गर्मी या झुनझुनी, भटकाव और कुछ अस्थायी परेशानी होना।

यह ध्यान रखें कि कई लोगों के लिए, खासतौर से इसमें नए हैं, ध्यान एक शक्तिशाली अनुभव हो सकता है। इसलिए इसके कारण जो अस्थायी अनुभव होते हैं, वह अक्सर आपके मन और शरीर की ध्यान के शक्तिशाली अनुभवों के प्रति अनुकूलन प्रक्रिया के कारण होते हैं।

इसके अलावा, कुंडलिनी ध्यान में गहरी श्वास लेने के व्यायाम और धीमी गति से श्वास लेना शामिल है। यदि आपको पहले से ऐसा करने का अभ्यास नहीं हैं, तो शुरुआती दिनों में आपको चक्कर आने या सिर चकराने जैसा अनुभव हो सकता है।

इसीलिए हमने ऊपर सलाह दी है कि शुरुआत में ध्यान की अवधि को छोटा रखें, और दिन-व-दिनजैसे-जैसे आपको इसका अनुभव होता जाये तो अपनी अवधि बढ़ाते जाएँ। इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर बीच-बीच में ब्रेक लें और ध्यान से पहले और बाद में खूब पानी पिएं।

निष्कर्ष

अपने आध्यात्मिक सफर में व्यक्ति को कुंडलिनी ध्यान से कई लाभ और अनुभव प्राप्त हो सकते हैं, फिर भले ही यह उन्हें पूर्ण जागृति की ओर न ले जा पाए। वास्तव में, कुछ अभ्यासी इसे ध्यान लगाना सीखने के सबसे शक्तिशाली रूपों में से एक मानते हैं।

कुंडलिनी अभ्यास के शुरुआती दिनों में ही आपको अपने स्वास्थ्य और मनोदशा में कुछ सुधार दिखाई दे सकते हैं, लेकिन धैर्य और समर्पित अभ्यास आपको सबसे अधिक लाभ प्राप्त करने में मदद करेंगे।

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