डकैती | Dacoity | IPC Sections 395-402 | Indian Penal Code 1860

डकैती में चोरी, उद्दापन एवं लूट सभी के तत्व मौजूद होते हैं। जिस प्रकार लूट चोरी एवं उद्दापन का गम्भीर रूप है, उसी प्रकार `डकैती’ लूट का गम्भीर रूप है। “अपराध कारित करने वाले व्यक्तियों की संख्या” ही वह तत्व है जो डकैती को इसे चोरी, उद्दापन एवं लूट से भिन्न करता है।

धारा 391 डकैती (Dacoity) को परिभाषित करती है

जिसके अनुसार “जब कि पांच या अधिक व्यक्ति संयुक्त होकर लूट करते हैं या करने का प्रयत्न करते हैं। या जहाँ कि वे व्यक्ति, जो संयुक्त होकर लूट करते हैं, या करने का प्रयत्न करते हैं और वे व्यक्ति जो उपस्थित हैं और ऐसे लूट के किए जाने या ऐसे प्रयत्न में मदद करते हैं, कुल मिलाकर पांच या अधिक हैं, तब हर व्यक्ति जो इस प्रकार लूट करता है, या उसका प्रयत्न करता है या उसमें मदद करता है, कहा जाता है। कि वह ‘डकैती” करता है।”

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पाँच से कम व्यक्तियों की दोषसिद्धि

यदि डकैती करने वाले केवल पाँच ही व्यक्ति हैं और इन पाँच में से केवल तीन ही दण्डित होते हैं तथा शेष दो को उन्मुक्ति प्रदान कर दी जाती है तो तीन व्यक्तियों की दोषसिद्धि न्यायसंगत नहीं मानी जायेगी क्योंकि डकैती का अपराध पाँच से कम व्यक्ति सम्पादित नहीं कर सकते ।84 किन्तु यदि अनेक व्यक्तियों को उन्मुक्ति प्रदान किये जाने के बावजूद यह पाया जाता है कि उन व्यक्तियों के साथ जिन्होंने अपराध में भाग लिया, भाग लेने वालों का योग पाँच या इससे अधिक हो जा रहा है तो पहचाने गये व्यक्तियों की दोषसिद्धि भले ही उनकी संख्या पाँच से कम हो, विधि-विरुद्ध नहीं होगी। डकैती के एक प्रकरण में यदि चुरायी वस्तु अभियुक्त के कथन के आधार पर घटना से तुरन्त बाद पुनः प्राप्त कर ली जाती है और यह प्राप्ति पुलिस अधिकारियों एवं उन पंचों, जिन्होंने इसी आशय का वक्तव्य दिया था, की उपस्थिति में की जाती है तो अभियुक्त न केवल धारा 412 के अन्तर्गत दण्डित किया जाएगा अपित धारा 391 के अन्तर्गत भी दण्डित होगा। पंचों के साक्ष्य बहुत महत्वपूर्ण होते हैं विशेषकर तब जबकि वस्तु एक ऐसे स्थान से प्राप्त की जाती है जहाँ सब की पहुँच नहीं है।

डकैती के लिए दण्ड धारा 395

जो कोई डकैती करेगा, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि 10 वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

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टिप्पणी

एक डकैती में 9 व्यक्तियों ने भाग लिया था जिसमें से पाँच को छोड़ दिया गया तथा शेष 4 को सत्र न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि प्रदान की गयी। उच्च न्यायालय ने 4 में से 3 को उन्मुक्त कर दिया केवल एक को दण्डित किया। ऐसी स्थिति में एक व्यक्ति की दोषसिद्धि न्यायोचित नहीं कही जा सकती, क्योंकि डकैती में कम से कम 5 व्यक्तियों की आवश्यकता पड़ती है।

एक प्रकरण में अभियुक्तों पर रेलवे सम्पत्ति के सम्बन्ध में डकैती डालने का आरोप लगाया गया था। किन्तु इस बात का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं था। केवल यह पाया गया था कि रेलवे पटरी के समीप एक ट्रक खड़ी थी जिस पर सीएसटी प्लेटे रखी हुई थी। जब पुलिसकर्मियों ने टक रोकने का आदेश दिया तो अभियक्तों ने ट्रक रोकने से इन्कार कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने अभिनिर्धारित किया कि इन तथ्यों के आधार पर अभियुक्तों को डकैती का दोषी नहीं माना जा सकता, क्योंकि प्रथमतः यह कि ट्रक में जो सामान जाया जा रहा था वह रेलवे की सम्पत्ति थी और उसकी चोरी की गयी थी, इस तथ्य की पुष्टि नहीं हो पायी। द्वितीयतः यह कि पुलिसकर्मियों द्वारा ट्रक रोकने का आदेश देना तथा ट्रक कर्मियों द्वारा उस आदेश की अवहेलना करना डकैतों के अपराध का साक्ष्य नहीं हो सकता।

प्रवीन बनाम मध्य प्रदेश राज्य के वाद में दिन-दहाड़े डकैती कारित की गई थी। बैंक के मैनेजर ने अभियुक्तों में से एक को पहचाना जिसकी बैंक वे एक अन्य कर्मचारी ने भी पुष्टि की। यह अभिनिर्धारित किया गया कि पहचान करने में तमाम कमियों के बावजूद विशेष तथ्यों के आधार पर साक्ष्य मान्य माना जायेगा। पहचान परेड कराने में आरोपित विलम्ब का कोई महत्व नहीं था। अभियुक्त के पास से 40,000 रुपये की धनराशि बैंक स्लिप और अन्य अभिलेख भी बरामद हुआ था। अतएव यह अभिनिर्धारित किया गया कि साक्ष्य अधिनियम की धारा 114 के अन्तर्गत उपधारणा की जा सकती है। आगे यह भी कि अभियुक्त के पास से मिला बैंक के अधिकारी का झोला जिसमे उसके प्राइवेट अभिलेख थे। अत्यन्त महत्वपूर्ण था। अतएव इन तथ्यों और परिस्थितियों के आलोक में यह निष्कर्ष कि अभियुक्त डकैती अपराध का दोषी था हस्तक्षेप करने योग्य नहीं है।

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हत्या सहित डकैती धारा 396

यदि ऐसे पांच या अधिक व्यक्तियों में से, जो संयुक्त होकर डकैती कर रहे हों, कोई एक व्यक्ति इस प्रकार डकैती करने में हत्या कर देगा, तो उन व्यक्तियों में से हर व्यक्ति मृत्यु से, या आजीवन करावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा। इस प्रकार यह धारा `प्रल्क्षित आपराधिकता’ (Constructive Criminality) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है जिसमें व्यक्ति को स्वयं के कार्य के लिए दायित्वाधीन न ठहराकर किसी अन्य व्यक्ति के कृत्य के लिए दायी ठहराया जाता है। लेकिन यह आवश्यक है कि हत्या डकैती करते समय की गई हो, यद्यपि यह ज़रूरी नही हत्या स्थल पर सभी अभियुक्तों की उपस्थिति आवश्यक नहीं है।

अ के मकान में पाँच डकैतों के एक समूह ने धावा बोल दिया। उनमें से एक के पास बन्दूक थी। लूट करने के पश्चात् जबकि डाकू लूट में प्राप्त सम्पत्ति के साथ भाग रहे थे, एक ग्रामवासी को मार डाले तथा दूसरे को घातक रूप में घायल कर दिये जिसकी बाद में मृत्यु हो गयी। यह अभिनिर्णीत हुआ कि यह हत्या सहित डकैती का मामला है और उस समूह का प्रत्येक व्यक्ति हत्या सहित डकैती का अपराधी है।

उ. प्र. राज्य बनाम सुखपाल सिंह एवं अन्य के वाद में अभियुक्तगणों ने परिसर में प्रवेश किया, लाइसेंसी बन्दूक और अन्य वस्तुयें लूट लिया ओर दो लोगों की मृत्यु कारित कर दी और अन्य को चोटें कारित किया। सभी अभियोजन साक्षियों ने यह कथन किया कि वे अभियुक्तगणों को जानते थे और वे उनके लिये अजनबी नहीं थे। चन्द्रमा की तथा लालटेन की रोशनी में उन्हें भलीभांति पहचान लिये। अतएव यह अभिनिर्धारित किया गया कि पहचान परेड कराने की आवश्यकता नहीं थी। अतएव अभिलेख पर उपलब्ध समस्त साक्ष्य का गलत अर्थ लगाकर और पहचान परेड न कराने के आधार पर उच्च न्यायालय द्वारा अभियुक्तगणों को दोषमुक्त करना निरस्त करने योग्य था और विचारण न्यायालय का भारतीय दण्ड संहिता की धारा 396 के अधीन दोषसिद्धि का निर्णय उच्चतम न्यायालय द्वारा पुन: स्थापित किया गया।

धारा ३९७ के अन्तर्गत मृत्यु या घोर उपहति कारित करने के प्रयत्न के साथ लूट या डकैती को दण्डनीय बनाया गया है तथा धारा ३९८ के अधीन घातक आयुध से सज्जित होकर लूट या डकैती करने के प्रयत्न को दण्डनीय बनाया गया है, जिनके लिए न्यूनतम ७ वर्ष का कारावास का प्रावधान किया गया है।

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डकैती करने के लिए तैयारी करना धारा 399

जो कोई डकैती करने के लिए कोई तैयारी करेगा, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा, और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

इस संहिता के अन्तर्गत केवल तीन मामलों में तैयारी को दण्डनीय बनाया गया है।

  1. भारत सरकार के विरुद्ध युद्ध करने के आशय से तैयारी करना (धारा 122),
  2. भारत सरकार के साथ शान्ति का सम्बन्ध रखने वाली शक्ति के राज्य क्षेत्र में लूटपाट करने की तैयारी करना (धारा 126),
  3. डकैती करने की तैयारी (धारा 399)

प्रचलित अर्थों में डकैती करने के लिये मात्र एकत्रित होना ही तैयारी है। एकत्र हुए बिना किसी अन्य तैयारी को इस धारा के अन्तर्गत तैयारी नहीं माना गया है। डकैती करने के लिये मात्र एकत्र होना ही बिना तैयारी के सबूत को धारा 402 के अन्तर्गत दण्डनीय बनाया गया है। कोई व्यक्ति डकैती डालने का अपराधी न होते हुये भी डकैती डालने की तैयारी का अपराधी हो सकता है। इसी प्रकार डकैती करने की तैयारी का दोषी न होते हुये भी डाका डालने के लिये एकत्र होने का दोषी हो सकता है।

डाकुओं की टोली का होने के लिए दण्ड धारा 400

जो अभ्यासत: डकैती करने के प्रयोजन से सहयुक्त हों, वह आजीवन कारावास से, या कठिन कारावास से, जिसकी अवधि दस वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

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चोरों की टोली का होने के लिए दण्ड धारा 401

जो अभ्यासत: चोरी या लुट करने के प्रयोजन से सहयुक्त हों और वह टोली ठगों या डाकुओं की टोली न हो, वह कठिन कारावास से, जिसकी अवधि सात वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जाएगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

धारा 400 व 401 के अन्तर्गत उन व्यक्तियों को दण्डित किया गया है जो अभ्यासत: चोरी या डकैती डालने वाले समूह से सहयुक्त होते हैं। इस का उद्देश्य डाकुओं के समूह को नष्ट करना है। यह तथ्य कि कुछ औरतें डाकुओं के साथ उनकी पत्नियों या रखैलों के रूप में रह रही हैं, इस बात को सिद्ध करने के लिये पर्याप्त नहीं है कि डाकुओं के गिरोह से उनका सम्बन्ध है। यह सिद्ध करना आवश्यक है कि औरतें स्वयं पतियों या रखवालों से अभ्यासत: स्वयं डकैती करने के लिये सहयुक्त थीं।