नीम के 10 स्वास्थ्य लाभ

प्राचीन काल से ही आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी और नेचुरोपैथी के स्कूलों में नीम के चिकित्सीय मूल्यों को सम्मानित और समर्थित किया जाता आ रहा है।

इस सदाबहार पेड़ का औषधीय प्रमाण ऐसा है कि नीम को अक्सर भारत में “गॉंव का दवाखाना” या “आल-इन-वन दवाखाना” के रूप में जाना जाता है, जिसका मतलब है कि यह बहुत सारी स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज में मदद कर सकता है।

140 से अधिक जैविक रूप से सक्रिय यौगिकों से भरपूर होने के कारण, इस पेड़ का लगभग हर हिस्सा बेशकीमती होता है और किसी न किसी बीमारी के लिए एक प्रभावी दवा के रूप में काम कर सकता है।

तमिलनाडु की अन्नामलाई यूनिवर्सिटी में हुए एक रिव्यु के अनुसार नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल, एनाल्जेसिक (दर्द कम करने वाली), एंटीपायरेटिक (बुखार कम करने वाली), एंटीसेप्टिक, एंटीडायबिटिक (मधुमेह रोधी), एंटी-फंगल, शुक्राणुनाशक और रक्त को साफ़ करने वाली प्रॉपर्टीज होती हैं, जो इसे एक वास्तविक रामबाण औषधि बनाती हैं।

नीम की जड़ें, छाल, गोंद, पत्ते, फल, टहनियाँ, बीज की गुठली, और बीज के तेल का उपयोग कई चिकित्सीय दवाओं में किया जाता है, जो आंतरिक और बाहरी दोनों प्रकार से उपयोग की जा सकती हैं।

नीम के पेड़ पर्यावरण के लिए भी काफी फायदेमंद होते हैं। इसलिए नीम के पेड़ जितना आप सोच सकते हैं उससे कहीं अधिक आपके स्वास्थ्य में सहायक होते हैं।

उदाहरण के लिए, नीम कोटेड यूरिया सादे यूरिया उर्वरक के एक बेहतरीन विकल्प के रूप में उभरा है, क्योंकि यह पर्यावरण को प्रदूषित किए बिना मिट्टी के स्वास्थ्य और उर्वरक की शक्ति को बढ़ावा देता है।

नीम के 10 सबसे अधिक कारगर फायदे

  1. डैन्ड्रफ (बालों की रूसी) को खत्म करती है
  2. स्किन प्रॉब्लम्स को दूर करती है
  3. सिर के जूँ को मारती है
  4. मुंह को स्वस्थ रखती ह
  5. रक्त को शुद्ध करती है
  6. डायबिटीज को नियंत्रित करती है
  7. पेट और आँतों के कीड़ों को खत्म करती है
  8. गठिया की सूजन से छुटकारा दिलाती है
  9. नाखूनों में होने वाली समस्यायों से लड़ती है
  10. कैंसर को ठीक करती है

1. डैन्ड्रफ (बालों की रूसी) को खत्म करती है

चीन की सिचुआन एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध के अनुसार, नीम में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो इसे डैंड्रफ के इलाज और आपके सिर को स्वस्थ रखने में बहुत प्रभावी बनाते हैं।

यह डैंड्रफ के दो सामान्य लक्षणों - सूखापन और खुजली से भी छुटकारा दिलाती है।

  • मुट्ठी भर नीम की पत्तियों को 4 कप पानी में तब तक उबालें जब तक कि पत्तियों का रंग फीका न पड़ जाए और पानी हरा न हो जाए। इस पानी को ठंडा होने दें और फिर अपने बालों को शैम्पू करने के बाद इस पानी से धोएं। यह आपके बालों को कंडीशन करने में भी मदद करेगा।
  • या फिर, चार बड़ी चम्मच नीम के पाउडर में जरूरत अनुसार पानी मिलाकर पेस्ट तैयार करें। इसे अपने बालों पर जड़ों तक लगाएं। इसे 30 मिनट के लिए छोड़ दें, और फिर हमेशा की तरह अपने बालों को शैम्पू और कंडीशन कर लें।

2. स्किन प्रॉब्लम्स को दूर करती है

आपकी स्किन को स्वस्थ और बेदाग रखने के लिए नीम एक अच्छा विकल्प होती है।

तमिलनाडु में हुए एक शोध के अनुसार नीम में मौजूद एंटीवायरल, एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण स्किन की कई समस्याओं, जैसे मुंहासे, चकत्ते, सोरायसिस और खुजली के इलाज और रोकथाम में मदद कर सकते हैं।

इसके अलावा, यह घावों को भरने और किसी भी संक्रमण या विषाक्तता को रोकने में मदद करती है। उदाहरण के लिए, जली हुई स्किन पर नीम के पानी का उपयोग करने से उपचार में तेजी आने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्र को एलर्जी या संक्रमण के खतरे से भी बचाया जा सकता है।

नीम में अत्यधिक मात्रा में एंटीऑक्सिडेंट भी होते हैं, जो स्किन को पर्यावरणीय क्षति से बचाने में मदद करते हैं और फ्री रेडिकल गतिविधि के कारण होने वाले उम्र बढ़ने के संकेतों को कम करते हैं।

वहीं दूसरी ओर, नीम का तेल स्किन को नम करने के साथ-साथ खुजली और जलन को कम करने में मदद कर सकता है।

नीम के अर्क और तेल को व्यापक रूप से ब्यूटी प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल किये जाने से यह सिद्ध होता है कि नीम स्किन के लिए फायदेमंद होती है।

  • किसी भी प्रकार की स्किन की समस्या होने पर, कुछ नीम की पत्तियों को पीसकर पेस्ट बना लें। अब इस पेस्ट को अपनी स्किन पर लगा लें और अपनेआप सूखने का इंतजार करें। सूखने के बाद इसे ताजा पानी से धो लें। इस उपचार को रोज करें जब तक समस्या पूरी तरह से खत्म न हो जाये।
  • या फिर, आप 1 बड़ी चम्मच नीम के तेल में 1/3 चम्मच जैतून का तेल या नारियल का तेल मिलाकर अपनी स्किन की मालिश भी कर सकते हैं। ऐसा करने से स्किन के सेल्स फिर से युवा हो जायेंगे और स्किन की इलास्टिसिटी बढ़ जाएगी। यह उपचार स्किन को गोरा बनाने में भी मदद करता है।

3. सिर के जूँ को मारती है

2012 में इजिप्ट की काइरो यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध में नीम के बीज का अर्क एक ही उपचार से सिर के जूँ के संक्रमण को समाप्त कर सकता है, क्योंकि यह एक प्राकृतिक और गैर-विषाक्त कीटनाशक के रूप में कार्य करता है।

इसके अलावा, नीम सिर की खुजली और जलन से राहत प्रदान करने में प्रभावी है, जो आमतौर पर जूँ के संक्रमण के बाद होती है।

  • अपने बालों को किसी भी हर्बल नीम-आधारित शैम्पू से सप्ताह में 2 या 3 बार धोकर जूँ की कंघी करें।
  • या फिर, नीम के पत्तों का पेस्ट बनाकर अपने बालों की जड़ों तक लगाएं। अब इसे अपनेआप सूखने तक इंतजार करें और फिर गर्म पानी से धो लें। इसके बाद पतली कंघी से बालों की कंघी करें। इस उपचार को 2 महीनों तक हफ्ते में 2 या 3 बार करें।
  • नीम के तेल से बालों और सिर की मालिश करना भी बहुत असरदार होता है। मालिश करने के बाद जूँ को निकालने के लिए पतली कंघी से बालों की कंघी करें। आप अपने बालों को धोने से पहले नीम के तेल को लगभग एक घंटे या रात भर के लिए लगा छोड़ सकते हैं।

4. मुंह को स्वस्थ रखती है

नीम मौखिक स्वास्थ्य को बनाए रखने और विभिन्न प्रकार की मसूड़ों की बीमारियों को दूर रखने में भी मदद करती है।

2016 में केरल के जेकेके नटराज डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में हुए एक शोध के अनुसार, नीम के एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण मुँह में कैविटी, प्लेक, मसूड़ों की सूजन और छालों का कारण बनने वाले बैक्टीरिया को मारने में मदद करती है।

नीम के अर्क को टूथपेस्ट और माउथवॉश जैसे मौखिक स्वच्छता उत्पादों में नियमित रूप से उपयोग किया जाता है, क्योंकि यह मुँह में बदबू पैदा करने वाले पैथोजन्स को ख़त्म करती है।

यह मुँह के ऊतकों की प्रतिरक्षा को भी बढ़ावा देती है और सफेद व चमकदार दांत बनाने में मदद करती है।

  • नीम की पत्तियों में से जूस निकाल लें और इससे दांतों और मसूड़ों का धीरे-धीरे मंजन करें। कुछ देर मंजन करने से बाद हलके गर्म पानी से कुल्ला करें। इस उपचार को रोज एक या दो बार करें। आप नीम की दातून से भी मंजन कर सकते हैं।
  • ऐसे टूथपेस्ट, माउथवाश और ओरल टॉनिक का उपयोग करें जिनमें नीम एक मुख्य घटक हो।

5. रक्त को शुद्ध करती है

नीम एक शक्तिशाली रक्त शोधक और विषनाशक के रूप में काम करती है, जिससे शरीर से हानिकारक विषाक्त पदार्थों को साफ करने में मदद मिलती है।

नीम रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करने का भी काम करती है है, जिसके पूरे शरीर में रक्त संचार में सुधार होता है।

हालाँकि नीम का रक्त शोधक के रूप में सकारात्मक प्रभाव काफी स्पष्ट है, लेकिन इस दावे को पूरी तरह से स्थापित करने के लिए अभी और शोध होना आवश्यक है। (स्त्रोत)

नीम के रक्त शोधक गुण को देखते हुए, नीम शरीर के महत्वपूर्ण अंगों, जैसे कि किडनी और लिवर के कामकाज पर उत्तेजक प्रभाव डाल सकती है, और स्वस्थ रक्त संचार, पाचन, श्वसन और मूत्र प्रणाली को बनाए रखने में मदद करती है।

  • रोजाना खाली पेट नीम के 2 या 3 कोमल पत्तों को शहद में मिलाकर कुछ हफ्तों तक खाने से शरीर और स्किन में सकारात्मक बदलाव आता है।
  • वैकल्पिक रूप से, कुछ हफ्तों के लिए भोजन के साथ दिन में दो बार 1 या 2 नीम के कैप्सूल लें। सही डोज के बारे में जानने के लिए अपने डॉक्टर से सलाह लें।

6. डायबिटीज को नियंत्रित करती है

2000 में इंडियन जर्नल ऑफ फिजियोलॉजी एंड फार्माकोलॉजी में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, नीम ब्लड शुगर को नियंत्रित करने या डायबिटीज की शुरुआत को रोकने या देरी करने में सहायक हो सकती है।

नीम के पत्तों के अर्क में कई ऐसे यौगिक होते हैं, जो मधुमेह वाले लोगों में ब्लड ग्लूकोज के स्तर पर बिना कोई प्रभाव डाले इंसुलिन की जरूरत को कम कर सकते हैं।

  • नीम की गोलियां ब्लड शुगर के स्तर को कम करने में मदद करती हैं। इसलिए मधुमेह को नियंत्रित करने के लिए डॉक्टर से उचित डोज के बारे में सलाह लेकर नीम की गोलियां या चूर्ण लें।
  • जिन लोगों को मधुमेह होने का अधिक खतरा होता है, वे इसे रोकने के लिए रोजाना या हर दूसरे दिन खाली पेट 4 या 5 कोमल नीम के पत्ते चबा सकते हैं।

नोट: नीम आपकी दवा के ब्लड लेवल को कम करने वाले प्रभावों को बढ़ा सकती है, जिससे शुगर लेवल खतरनाक रूप से निम्न स्तर तक गिर सकता है। इसलिए, यदि आप पहले से ही डायबिटीज की दवा ले रहे हैं, तो नीम को उपाय के रूप में उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

7. पेट और आँतों के कीड़ों को खत्म करती है

नीम अपने एंटीपैरासिटिक गुणों के कारण पेट और आंतों के कीड़ों पर उपचारात्मक और निवारक प्रभाव डालती है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया में हुए एक शोध के अनुसार, नीम में ऐसे कुछ यौगिक मौजूद होते हैं जो परजीवी के भोजन करने की क्षमता को रोकते हैं, इस प्रकार उनके जीवन चक्र में बाधा आती है और वह नए परजीवियों के अंडे नहीं दे पाते।

नीम उन विषाक्त पदार्थों को भी साफ करती है, जिन्हें परजीवी मरने के बाद पीछे छोड़ देते हैं।

  • पेट के कीड़ों से छुटकारा पाने के लिए 1 से 2 सप्ताह तक रोज नीम के कोमल पत्तों को खाली पेट चबाएं या नीम की चाय को दिन में 2 बार पियें।
  • आप डॉक्टर से सलाह लेने के बाद नीम के कैप्सूल या सप्लीमेंट भी ले सकते हैं।

8. गठिया की सूजन से छुटकारा दिलाती है

गठिया या आर्थराइटिस के इलाज में नीम काफी प्रचलित हर्बल औषधि है, खासतौर से ऑस्टियोआर्थराइटिस और रयूमेटाइड आर्थराइटिस में।

भारत के पक्षिम बंगाल में हुए एक शोध के अनुसार, नीम में जोड़ों की सूजन और दर्द को कम करने वाले गुण होते हैं।

  • एक मुट्ठी नीम की पत्तियों को एक गिलास पानी में उबालें। अब पानी को छान लें और ठंडा होने दें। इस पानी को दिन में दो बार सेवन करें। ऐसा लगातार 1 महीने तक करने से गठिया के दर्द और सूजन में काफी फायदा मिलता हैं।
  • जोड़ों की नीम के तेल से मालिश करने से भी दर्द में काफी राहत मिलती है।

9. नाखूनों में होने वाली समस्यायों से लड़ती है

नाखूनों में होने वाली किसी भी प्रकार की समस्या जैसे नाखून टूटना, छिल जाना या नाखूनों का कड़क हो जाना आदि को ठीक करने के लिए नीम काफी फायदेमंद होती है।

इसके अलावा, इसके एंटीसेप्टिक और एंटीफंगल गुण टोनेल फंगस सहित विभिन्न प्रकार के नाखून संक्रमणों के इलाज और रोकथाम में मदद कर सकते हैं। (स्रोत)

  • नाखून के फंगस के इलाज के लिए बस 1 महीने के लिए संक्रमित नाखून पर रोजाना दो बार नीम का तेल लगाएं। यह उपाय आपके नाखूनों को मजबूत बनाने में भी मदद करता है, इस प्रकार उन्हें छिलने या नाजुक होने से रोकता है।
  • मुँह से नाखून काटने की आदत को रोकने के लिए आप अपने नाखूनों पर नीम का तेल भी लगा सकते हैं। कड़वा स्वाद आपको अपनी उंगलियां मुंह में डालने से हतोत्साहित करेगा।

10. कैंसर को ठीक करती है

2014 में रोजवेल पार्क कैंसर इंस्टीट्यूट में हुई एक रिसर्च के अनुसार नीम के अर्क, बीज, पत्ते, फूल और फलों में ब्रैस्ट कैंसर, गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर जैसे विभिन्न प्रकार के कैंसरों के प्रति कीमोप्रिवेंटिव और एंटीट्यूमर प्रभाव होते हैं।

नीम के पत्तों में मौजूद कई घटक, जिसमें एंटीऑक्सीडेंट भी शामिल हैं, कैंसर के इलाज में फायदेमंद होते हैं।

इसके अलावा, नीम इम्यून सिस्टम को बेहतर करके, इन्फ्लेमेशन को कम करके, फ्री रेडिकल्स को हटाकर, हार्मोनल गतिविधि को अवरुद्ध करके और कोशिका विभाजन को रोककर कैंसर को रोकने या उसका इलाज करने में मदद कर सकती है।

नोट – कैंसर का इलाज करने या इसके खतरे को कम करने के लिए नीम या किसी अन्य जड़ी-बूटी का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श करें।

ध्यान रखें – कभी भी नीम के तेल का सेवन न करें। नवजात शिशुयों या छोटे बच्चों को नीम का सेवन न कराएँ। गर्भवती और दूध पिलाने वाली महिलायें भी नीम का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह लें।

सावधानियाँ

नीम को घरेलू उपाय के रूप में उपयोग करने के कई व्यापक स्वास्थ्य लाभ होने के बावजूद, इसके उपयोग में कुछ सावधानियाँ रखना भी महत्वपूर्ण है।

  • नीम का अत्यधिक सेवन करने से गुर्दे में खराबी होने के साथ-साथ आपको थकान होने की समस्या भी हो सकती है। साथ ही, लो ब्लड प्रेशर या पहले से मौजूद किडनी या लिवर की समस्या वाले लोगों को इसका इस्तेमाल न करने की सलाह दी जाती है।
  • ऑटोइम्यून बीमारियों, जैसे कि ल्यूपस (स्किन में इन्फ्लेमेशन), रूमेटाइड गठिया और मल्टीपल स्केलेरोसिस वाले लोगों को नीम का उपयोग करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए और किसी भी जटिलता से बचने के लिए अपने डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए।
  • नीम की छोटी सी खुराक भी नवजात शिशुओं के लिए घातक साबित हो सकती है, इसलिए शिशुओं और छोटे बच्चों को इसे बिलकुल भी नहीं लेना चाहिए।
  • नीम गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं या उन महिलाओं के लिए भी सुरक्षित नहीं है जो गर्भधारण करने की कोशिश कर रहीं हैं, क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है।
  • साथ ही, नीम के तेल का सेवन किसी को भी नहीं करना चाहिए। यह केवल बाहरी उपयोग के लिए होता है।

दवाओं के साथ प्रतिक्रिया

  • नीम का शरीर में एक प्रतिरक्षा बढ़ाने वाला प्रभाव होता है, इसलिए यह इम्यूनो डिप्रेसेंट दवा, जो किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को दबा देती है, के प्रभाव को कम कर सकती है।
  • नीम में शुगर के स्तर को कम करने वाले गुण होते हैं, जो इसे मधुमेह की दवाओं के साथ सेवन करने के लिए असुरक्षित बनाते हैं। नीम इन दवाओं के प्रभाव को बढ़ा सकती है और आपके ब्लड शुगर को खतरनाक रूप से कम कर सकती है।
  • इसके मूत्रवर्धक प्रभाव को देखते हुए, नीम शरीर की लिथियम को उत्सर्जित करने की क्षमता को बाधित कर सकती है। इसके बाद, शरीर में लिथियम का बढ़ा हुआ स्तर जहरीला साबित हो सकता है और गंभीर दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है।
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