गठिया रोग के घरेलू 10 घरेलू उपचार

गठिया रोग या आर्थराइटिस घुटने, कूल्हे, हाथ और शरीर के अन्य जोड़ों में होने वाला एक रोग है। इसके कारण जोड़ों में इन्फ्लामेशन और घर्षण होने लगता है, जिससे अत्यधिक दर्द होता है

दर्द के अलावा गठिया के अन्य लक्षण हैं – जोड़ों के आसपास सूजन और लालिमा होना, उठने-बैठने में परेशानी महसूस होना, घुटनों में दर्द और गठिया वाले स्थान का कठोर हो जाना।

गठिया के 100 से भी ज्यादा प्रकार होते हैं और इसकी गंभीरता इसके प्रकार पर निर्भर करती है। डॉक्टर इसकी जाँच करके उचित दवाएं लेने की सलाह देता है। लेकिन आप सिर्फ शारीरिक रूप से सक्रिय रहकर और कुछ आसान घरेलू उपचारों को अपनाकर भी आर्थराइटिस से राहत पा सकते हैं।

यहाँ पर गठिया रोग को ठीक करने के 10 सबसे कारगर घरेलू उपचार दिए जा रहे हैं –

1. सेब का सिरका (एप्पल साइडर विनेगर)

सेब के सिरका में कई मिनरल्स जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फॉस्फोरस पाए जाते हैं। इसलिए यह जोड़ों के दर्द में राहत प्रदान करता है। साथ ही यह जोड़ों और कनेक्टिव टिश्यू में विषाक्त पदार्थों को बनने से रोकता है।

  • दो कप गर्म पानी लें।
  • अब इसमें एक-एक चम्मच सेब का सिरका और शहद मिला दें।
  • इसे रोज सुबह सेवन करें। इसका शरीर पर क्षारकारी प्रभाव होता है।

2. अदरक

अदरक भी गठिया के उपचार में फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं।

  • 6 चम्मच सूखा अदरक, 6 चम्मच जीरा का पाउडर और 3 चम्मच काली मिर्च को आपस में मिलाकर पीस लें। इस मिश्रण को दिन में तीन बार आधा-आधा चम्मच लेकर पानी के साथ सेवन करें।
  • अदरक के तेल से जोड़ों की मालिश करने से दर्द, सूजन और कठोरता कम होगी।
  • इसके साथ ही कच्चे अदरक का नियमित सेवन करें। यह ब्लड सर्कुलेशन को ठीक करके दर्द को करने में मदद करता है। कच्चे अदरक को स्लाइसेस में काटकर खाने के साथ सलाद की तरह सेवन करें।

3. सरसों के तेल की मालिश

गठिया के इन्फ्लामेशन और जोड़ों के दर्द को ठीक करने के लिए सरसों के तेल की मालिश को काफी फायदेमंद माना जाता है। सरसों का तेल प्राकृतिक मरहम की तरह काम करता है और रक्त के प्रभाह को ठीक करता है।

  • सरसों के तेल को हल्का गर्म कर लें। यदि जोड़ों में अत्यधिक सूजन हो तो इसमें समान मात्रा में प्याज का रस भी मिला लें। अब इसे जोड़ों पर लगाकर धीरे-धीरे मालिश करें। अच्छा रिजल्ट पाने के लिए इस उपचार को रोज सोने से पहले करें।
  • आप सरसों के तेल में समान मात्रा में नीलगिरी का तेल भी मिला सकते हैं। यह भी इन्फ्लामेशन को ठीक करता है।

4. हल्दी

हल्दी का नियमित सेवन करने से इन्फ्लामेशन और सूजन कम होती है। इसमें करक्यूमिन (curcumin) नामक कंपाउंड पाया जाता है, जिसमें एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं। यह संधिशोथ (rheumatoid arthritis) में ज्यादा फायदेमंद होती है।

  • अपने भोजन में हल्दी का नियमित इस्तेमाल करें। रोज सोने से पहले एक गिलास दूध में एक चम्मच हल्दी मिलाकर सेवन करें। आप हल्दी का जूस बनाकर भी पी सकते हैं।
  • यदि समस्या गंभीर हो तो 500 मिग्रा से 1000 मिग्रा के बीच के हल्दी के कैप्सूल का दिन में तीन बार सेवन करें।

5. सेंधा नमक

सेंधा नमक मैग्नीशियम का एक अच्छा स्त्रोत होता है। मैग्नीशियम शरीर के pH मान को ठीक करता है। गठिया जैसी इन्फ्लेमेटरी डिजीज से बचने के लिए शरीर के ph मान का नियंत्रित रहना काफी जरूरी होता है, क्योंकि शरीर में एसिड लेवल बढ़ने पर यह बीमारी और ज्यादा गंभीर रूप ले सकती है।

  • सेंधा नमक और नींबू के रस को बराबर मात्रा में लेकर आधा कप गर्म पानी में मिलाएं। इस मिश्रण को रोज सुबह और रात को सोने से पहले एक-एक चम्मच सेवन करें।
  • या फिर, अपने नहाने के पानी में दो कप सेंधा नमक डालकर कुछ देर के लिए हॉट बाथ लें।

6. दालचीनी

दालचीनी में एंटी-इन्फ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट प्रॉपर्टीज होती हैं, जो गठिया के दर्द में राहत प्रदान करती हैं।

  • डेढ़ चम्मच दालचीनी के पाउडर और एक चम्मच शहद को एक कप गर्म पानी में मिलाएं और सुबह खाली पेट सेवन करें। इसे कुछ दिनों के लिए रोज करें।
  • आप दालचीनी और शहद का पेस्ट बनाकर जोड़ो में लगा भी सकते हैं।

7. मछली का तेल (फिश आयल)

फिश आयल में ओमेगा-3 फैटी एसिड्स होती हैं, जो शरीर में इन्फ्लेमेशन और दर्द को कम करने में मदद करती हैं।

  • रोज एक से दो चम्मच फिश आयल का सेवन करें।
  • रोज सुबह खाली पेट फिश आयल सप्लीमेंट का सेवन करने से सुबह की जकड़न कम होती है।

आप फिश आयल के अलावा ओमेगा-3 फैटी एसिड्स युक्त अन्य पदार्थों का सेवन भी कर सकते हैं, जैसे अलसी के बीज।

8. अल्फला (रिजका)

अल्फला को अल्फा-अल्फा और रिजका भी कहते हैं। इसमें भरपूर मात्रा में मिनरल्स होते हैं और यह pH लेवल को ठीक रखने में मदद भी करता है।

  • आप अल्फला के बीजों का इस्तेमाल करके टी बना सकते हैं। एक कप उबलते पानी में एक चम्मच अल्फला के बीज डालें। अब इसे 20 से 30 मिनट के लिए उबलने दें और फिर छान लें। इसे दो-तीन हफ्तों के लिए रोज दिन में दो बार सेवन करें।
  • आप अल्फला के कैप्सूल का सेवन भी कर सकते हैं। यह बाजार में आसानी से मिल जाते हैं और इनको रोज सेवन किया जा सकता है।

9. चेरी

चेरी मैग्नीशियम और पोटैशियम का बहुत ही अच्छा स्त्रोत होती है। यह दोनों पदार्थ आर्थराइटिस के मरीज के लिए फायदेमंद होते हैं। मैग्नीशियम प्राकृतिक दर्द निवारक की तरह काम करता है और पोटैशियम इन्फ्लामेशन को कम करता है।

  • रोज 8 से 10 चेरी का सेवन करें।
  • आप चेरी के सिरप का सेवन भी कर सकते हैं। चेरी को पानी में डालकर तब-तक उबालें जब तक कि यह गाड़े सिरप में न बदल जाये। कुछ महीनों के लिए इसका रोज सेवन करें।

10. बोरेज सीड आयल

बोरेज सीड आयल में एंटी-इन्फ्लेमेटरी प्रॉपर्टीज होती हैं, जो गठिया के लक्षणों को कम करने में मदद करती हैं। बोरेज आयल आसानी से बाजार में उपलब्ध होता है।

  • रोजाना नियमित रूप से बोरेज सीड आयल से अपने जोड़ों की मालिश करें।
  • दर्द कम करने के लिए आप रोजाना एक चम्मच बोरेज सीड आयल का सेवन भी कर सकते हैं।

नोट – बोरेज सीड आयल का सेवन किया जा सकता है, लेकिन बोरेज के बीज और बोरेज पौधे के अन्य भागों का सेवन न करें।

ऊपर दिए गए उपचारों को अपनाकर आपको आर्थराइटिस से काफी हद तक राहत मिलेगी। इसके साथ ही नियमित शारीरिक व्यायाम भी करते रहें।