Dr. Rahat Indori – Neend Se Jaago To Kuch Khwaab Dikhayenge Tumhe

Dr. Rahat Indori – Neend Se Jaago To Kuch Khwaab Dikhayenge Tumhe


Chalte phirte hue mehtaab

dikhayenge tumhe

Humse milna kabhi Punjab

dikhayenge tumhe

——

Chaand har chhat pe hai suraj

hai har ek aangan mein

Neend se jaago to kuch khwaab

dikhayenge tumhe

——

Ret ban jaata hai ud jata

hai saara paani

June mein gaanv ka taalaab

dikhayenge tumhe

——

Puchte kya ho ke rumaal ke

peeche kya hai

Phir kisi roz ye sailaab

dikhayenge tumhe

—————————————

चलते फिरते हुए महताब दिखाएंगे तुम्हे

हमसे मिलना कभी पंजाब दिखाएंगे तुम्हे

——

चाँद हर छत पे है सूरज है हर एक आँगन में

नींद से जागो तो कुछ ख्वाब दिखाएंगे तुम्हे

——

रेट बन जाता है उड़ जाता है सारा पानी

जून में गाँव का तालाब दिखाएंगे तुम्हे

——

पूछते क्या हो के रुमाल के पीछे क्या है

फिर किसी रोज़ ये सैलाब दिखाएंगे तुम्हे
 

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