आदम और हव्वा – धरती के सबसे पहले इंसान


आदम और हव्वा – धरती के सबसे पहले इंसान


धरती पर आने वाले सबसे पहले इंसान आदम और हव्वा थे । ‘आदम’ धरती के प्रथम पुरुष थे और ‘हव्वा’ प्रथम स्त्री थी । इन्हीं दोनों से पूरी मानव जाति की पैदाइश हुई।

अल्लाह एक है और सर्वशक्तिमान है​

सभी जहानों का रब एक ही है। वह सर्वशक्तिमान है। वह इच्छाधारी भी है । वह जो चाहता है वह हो जाता है । वह कहता है ‘कुन’ (हो जा) और वह बात हो जाती है ।


सूरह इखलास में अल्लाह तआला फरमाता है-

सूरह इखलासतर्जुमा / Transalation
कुलहु अल्लाहु अहदकह दीजिए कि अल्लाह एक ही है
अल्लाहुस्समदअल्लाह बेनियाज़ है। (वह किसी का मोहताज नहीं है )
लम यलिद वलम युलदन उससे कोई पैदा हुआ, न वह किसी से पैदा हुआ।
वलम यकुल्लहु कुफूअनहदऔर न कोई उसका हमसर है। (उसके जैसा या उसके बराबर का कोई नहीं है।)

मतलब यह कि सारे जहानों का मालिक सिर्फ एक है। वह ना तो किसी शरीर से पैदा हुआ है और ना ही उसने किसी को अपने जिस्म से पैदा किया। अल्लाह किसी पर आश्रित नहीं है। उसके बराबर का भी कोई नहीं है। उसका कोई परिवार, खानदान नहीं है । अल्लाह कुछ भी करने में सक्षम है।

अल्लाह की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ब्रह्मांड में अनगिनत विशाल नक्षत्र – ग्रह एक निश्चित मार्ग पर एक निश्चित गति से गतिमान हैं। इतने बड़े-बड़े आकाशीय पिंडों को बनाना और उनको एक निश्चित मार्ग पर अनंत काल के लिए चलाते रहना किसी आम शक्ति के वश की बात नहीं है। वह अल्लाह अवश्य ही सर्वशक्तिमान है। सबसे बड़ा है।

अल्लाह की छवि और क्षमता अकल्पनीय है​

दुनिया में जो कुछ भी है उसकी एक सीमा है। इसी तरह इंसान के मस्तिष्क की भी एक सीमा है। वह दुनिया बनाने वाले के सारे राज नहीं जा सकता। उसकी सोच वहां तक पहुंच ही नहीं सकती क्योंकि अल्लाह तआला ने इंसान के दिमाग को एक निर्धारित क्षमता दिया है, उस क्षमता के परे वह नहीं सोच सकता। अल्लाह की छवि, क्षमता, उसकी ताकत का अंदाजा लगाना इंसान के लिए अकल्पनीय है ।

इंसान और जिन्नात​

अनगिनत फरिश्ते हर वक्त अल्लाह की इबादत में लगे रहते हैं। इसी तरह बहुत सारे फरिश्ते अल्लाह के हुक्म की तामील में लगे रहते हैं।

अल्लाह तआला ने फरिश्तों के अलावा दो और मखलूक बनाया- एक जिन्नात जिसको आग से पैदा किया और दूसरा इंसान जिसको मिट्टी से बनाया।

पृथ्वी पर इंसान से पहले जिन्नात आबाद थे। ये क़बीलों में रहते थे। इनमे से कुछ बहुत दुस्ट थे दूसरों पर जुल्म करते थे। मार काट करते थे

अल्लाह ने जमीन पर शांति स्थापित के लिए फरिश्तों का एक टीम भेजा जिसका सरदार एक बहुत ही ताक़तवर जिन्नात था

इस टीम ने दंगाई जिन्नों को परास्त करके जंगल की तरफ खदेड़ दिया और उधर ही रहने का हुक्मदिया।

जिस जिन्नात के अगुआई में टीम आई थी उसी का नाम इब्लीस था

इब्लीस अल्लाह का बहुत ही इबादत गुजार और फरमाबरदार बंदा था। जो बाद में अल्लाह की नाफरमानी के कारण मरदूद हो गया। शैतान हो गया। जन्नत से निकल दिया गया।

अल्लाह तआला ने जब फरिश्तों को बताया कि वह जमीन पर अपना नायब बनाने वाले हैं तो फरिश्तों ने कहा कि आप उनको जमीन पर नायब बनाएंगे जो जाकर दंगा फसाद करेंगे ।अल्लाह ताला ने कहा तुम वह नहीं जानते जो मैं जानता हूं। इब्लीस ने सोचा मुझसे ज्यादा ताकतवर और मुझसे ज्यादा इबादत करने वाला कोई नहीं है. इसलिए अल्लाह तआला जमीन पर मुझे ही अपना नायब बनाएंगे.


आदम और हव्वा​

अल्लाह ने मिट्टी सेआदम को बनाया। कुछ अरसे के बाद हव्वा को बनाया

अल्लाह तआला ने आदम को धरती के चीजों के नाम सिखाये।

जब उनको तैयार कर लिया तो फरिश्तों के सामने पेश किया।

अल्लाह ने फरिश्तों से कुछ चीजों के नाम पूछे जिसे वो नहीं बता पाए। (क़ुरान-2:31)

फिर वही नाम उन्होंने आदम से पूछा। आदम ने सही सही सारे नाम बता दिए।

फरिश्तों ने कहा – ऐ मेरे परवरदिगार! हम सिर्फ उतना ही जानते हैं जितना आपने हमें सिखाया।

बेशक आप सब कुछ जानने वाले है।

अल्लाह तआला ने के कहा- मैंने कहा था न कि जो मैं जनता हूँ वो तुम लोग नहीं जानते। (क़ुरान-2:33)

आदम को सजदा​

अल्लाह ने फरिश्तों से कहा कि आदम को सजदा करें। सभी फरिश्तों ने आदम को सजदा किया।

फिर अल्लाह ने जिन्नातों के सरदार इब्लीस से भी कहा कि आदम को सजदा करे।

लेकिन इब्लीस ने सजदा करने से इंकार कर दिया।

इब्लीस ने कहा कि ये मिट्टी का बना है और मैं आग से बना हूँ। मैं इससे श्रेष्ठ हूँ।

मैं इसे क्यों सजदा करूँ। (क़ुरान-17:61, 20:116)

इब्लीस की बगावत

इब्लीस का गुरूर जाहिर हो चुका था लेकिन फिर भी वह झुका नहीं,अल्लाह से माफी नहीं मांगा. अल्लाह ताला ने इब्लीस को जन्नत से निकल जाने का हुक्म दिया।

इब्लीस ने कहा- ऐ मेरे परवरदिगार मुझे कयामत तक का मोहलत दे दीजिए (क़ुरान-15:36) .

जिसके कारण आप मुझे जन्नत से निकाल रहे हैं, मैं वादा करता हूं कि मैं इंसानों को गुमराह करता रहूंगा, उनको नेकी से दूर रखूँगा और बुराई की तरफ ले जाऊंगा। आगे से, पीछे से, बाएं से, दाएं से हर तरफ से मैं उनको बहकाऊंगा और वो आपके नाफरमान होंगे।

अल्लाह ने कहा- ठीक है मैं तुमको मोहलत देता हूं (क़ुरान-15:37) लेकिन इतना याद रखना कि जो मेरे नेक बंदे होंगे तुम उनको गुमराह नहीं कर पाओगे ।


जन्नत का फल​

अल्लाह तआला के हुक़्म से आदम हव्वा जन्नत में रहने लगे ।

अल्लाह ने उनको कहा कि जन्नत में जो चाहो खाओ पियो लेकिन एक खास दरख्त की तरफ इशारा करके उनको मना किया कि इसका फल मत खाना (क़ुरान-2:35, 7:19)।

लेकिन एक दिन शैतान के बहकावे में (क़ुरान-20:120) आकर आदम और हव्वा ने उस फल को खा लिया और फल खाते ही उनके शरीर का जन्नती लिबास झड़ गया। दोनों ने पेड़ के पत्तों से अपन सतर छुपाया। वे अपनी गलती पर बहुत रोये। अल्लाह से माफ़ी मांगे।

अल्लाह तआला ने उनको ये दुआ सिखाया –

“क़ाला रब्बना ज़लमना अनफुसना व इल्लम तग्फ़िरलना व तर हमना लनकू नन्न मीनल ख़ासिरीन” (क़ुरान 7 :23)

तर्ज़ुमा – दोनों बोल उठे, ” ऐ रब ! हमने अपने ऊपर ज़ुल्म किया। अब अगर तूने हमें माफ़ न किया और रहम न किया तो यक़ीनी तौर पर हम तबाह हो जायेंगे।”

इन लफ़्ज़ों में जब उन्होंने अपनी गलती मानी और माफ़ी मांगी तो अल्लाह ने उनको माफ़ कर दिया।

आप भी ये दुआ लिख कर रख लें और याद कर लें। ये दुआ अल्लाह से माफ़ी का, तौबा का बहुत बेहतरीन जरिया है।

आदम और हव्वा को जमीन पर उतारा गया​

अल्लाह तआला ने आदम और हव्वा को जमीन पर उतारा। आदम को श्रीलंका में और हव्वा जद्दा में उतारा जो सऊदी अरबिया में है ।अल्लाह के हुक्म से फरिश्ते आदम (अ. स.) को रास्ता बताते हुए हव्वा के पास ले गए। अल्लाह के हुक्म से दोनों जमीन पर रहने लगे। उनके बच्चे हुए और उन्ही से धरती पर इन्सानी जिंदगी आबाद होती चली गई। इस तरह से सभी धरती पर सभी इंसान आदम और हव्वा की ही औलाद हैं भले हो वह किसी भी मुल्क में रहता हो, किसी भी धर्म जाति का हो, काला हो या गोरा हो। । हर इंसान आपस में भाई भाई हैं।

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