सिर्फ मेरे चाहने से.
मोहब्बत कहां पूरी होगी
मेरी खातिर थोड़ा ही सही
बेचैन तो तुझे भी होना पड़ेगा.
आज सावन की भीगी ख़ुशबू ने
तेरी सांसों को भी सुलगाया होगा,
इश्क़ बरसाती उन बूँदों में
मेरा चेहरा नज़र तो आया होगा ।

यूँ तो हर एक दिल में दर्द नया होता है,
बस बयान करने का अंदाज़ जुदा होता है,
कुछ लोग आँखों से दर्द को बहा लेते हैं
और किसी की हँसी में भी दर्द छुपा होता है।
शब्दों से ही दिलों पर राज किया जाता है,
चेहरे का क्या है किसी भी हादसे मे बदल जाता है ।
हमसे बात कीजिये तो जरा एहतियात से…
हम लफ्ज भी सुनते है और लहजे भी…!
मोहब्बत उसको भी तो कहते हैं,
उसके नाम पे सब लिखना,

पर उसका नाम ना लिखना।।
परिंदो को मिलेगी मंज़िल एक दिन,

ये फैले हुए उनके पर बोलते है,
और वही लोग रहते है खामोश अक्सर,
ज़माने में जिनके हुनर बोलते है ..
सुबह उठते ही जिसे देखने का दिल करे…!
हमारी ऐसी मोहब्बत हो तुम ..

तुझसे बिछड़ कर अकेलेपन की हद कर दी,
तेरे बाद जितनी भी मोहब्बत आई रद्द करदी।।
लोग डूबते हैं तो समंदर को दोष देते हैं,
मंजिल न मिले तो मुकद्दर को दोष देते हैं,
खुद तो संभल कर चल नहीं सकते,
जब ठेस लगती है तो पत्थर को दोष देते हैं।
तेरी ख़ामोशी पर
फ़िदा तो हम है ही,
कुछ कह दो तो शायद
फ़ना हो जाएँ !!
मेरी रूह में हिस्सा है तुम्हारा भी बहोत,
मैं अगर तुमसे न मिलता तो अधूरा ही रह जाता।

बारिशों की तन्हाई में दिल अपना कुछ यूँ बहलाते हैं…
कुछ उनका लिखा दोहराते हैं, कुछ अपना लिखा मिटाते हैं…
नशा होता तो कबका उतर जाता,
बस मुझे तलब है तेरी सादगी की।
कभी तुम भी लिखा करों; दो शब्द हमारे लिए….
हमें सिर्फ लिखना नहीं पढ़ना भी अच्छा लगता है..
मेरा इश्क ले गया …..
मेरे खुदा के करीब..!!
तुझे पाने की जिद में …….
मैंने सजदे बढ़ा दिए….!!!!
हर इंन्सान का दिल बुरा नही होता
हर एक इन्सान बुरा नही होता
बुझ जाते है दीये कभी तेल की कमी से….
हर बार कुसूर हवा का नही होता !!!
हल्की हल्की बेवजह सी मुस्कुराहटें और तेरा ज़िक्र …
देखो ना कहीं ये मोहब्बत की आहट तो नहीं …..!!
लुटा तो सबने है,,
नाम लेने की बारी आई तो?
बस ज़िन्दगी का दिया

को
मालुम था कुछ नही होगा हासिल
लेकिन . . .

वो इश्क ही क्या जिसमें खुद को
ना गवायाँ जाए …

अच्छा लगता है कि
तुम पढ़ते हो मुझे
जाहिर नही होने देते
ये अलग बात है ।
बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना,,,
कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में ।।
“उसकी याद हमें बेचैन बना जाती हैं,
हर जगह हमें उसकी सूरत नज़र आती हैं,
कैसा हाल किया हैं मेरा आपके प्यार ने,
नींद भी आती हैं तो आँखे
बुरा मान जाती हैं.”
एक उम्र ग़ुज़ारी हैं हमने तुम्हारी ख़ामोशी पढते हुए,
एक उम्र गुज़ार देंगे तुम्हें महसूस करते हुए..

यूँ तो मेरी बस्ती के लोग भी कम हसीन ना थे,
बस दिल में शौक था उसको अपना बनाने का..!!
जिस दिन बंद कर ली हमने आंखे
कई आंखों से उस दिन आंसू बरसेंगे
जो करते है दिल से प्यार हमें
वही हमारी एक शरारत को तरसेंगे!!
उधार मांगा है, उनकी आँखों का काजल अपनी
शायारी के लिए,
शर्त उसने भी रख दी कि शायरी उनकी आँखों पर ही हो….!
इकरार में शब्दों की अहमियत नहीं होती,
दिल के जज़्बात की आवाज़ नहीं होती।
आँखे बयां कर देती है दिल की दास्तान,
मोहब्बत लफ़्ज़ों की मोहताज नहीं होती।
अगर कोई एक लफ्ज मे मेरी हर खुशी पूछे!
तो मै तेरे नाम के सिवा कुछ और ना कहू ।
जिंदगी की राह में मिलेंगे तुम्हे हजारों मुसाफिर,
उम्र भर ना भूल पाओगे वो मुलाकात हूँ मैं….।
मोहब्बत से अब कोसों दूर रखना मुझे ए खुदा….
यूँ बार बार मौत का सामना मेरे बस की बात नहीं

कोई तेरे साथ नहीं तो हम ना कर ,,
खुद से बढ़कर दुनियां में,
कोई हमसफ़र नहीं
मांगा नहीं था खुदा से तुम्हें
इशारा तुम्ही को था

नाम नहीं लिया मैंने
मगर पुकारा तुम्ही को था l
अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ,
अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता, तुम हो जाता हूँ ..
इश्क़ की भी अपनी बचकानी ज़िद है,
चुप कराने को भी वही चाहिए,
जो रुला कर गयी है….

सारे ज़माने को मेरे अल्फ़ाज़ समझ आते हैं,
तुम बताओ.. तुम किस दौर के ज़ाहिल हो..!!
उजड़ी बस्तियों में किसको ढूंढ़ते हो,
बर्बाद लोग अक्सर चाय की दुकान पर मिलते हैं।
“मेरी …बिगडी आदतों में..
शुमार है आज़ भी….
तुम्हें सोचना..
तुमहे चाहना और चाहते रहना..!!!
एक इल्जाम तेरे सर धर चुका हूं मैं,
तुझ पर जो बीत रही हैं,
उससे गुजर चुका है मैं,
इश्क़ किया था हमने भी हम भी रातो को जागे थे,
था कोई जिसके पीछे हम नंगे पांव भागे थे,

अपनी खुशियों का चाबी किसी को ना देना,,
लोग अक्सर दूसरो का सामान खो देते है।।।
हमें सीने से लगाकर हमारी सारी कसक दूर कर दो
हम सिर्फ तुम्हारे हो जाऐ हमें इतना मजबूर कर दो
‘गुफ्तगू’ करते रहिये,
थोड़ी थोड़ी अपने चाहने वालों से…
जाले’ लग जाते हैं,
अक्सर बंद मकानों में..
❣❣
तेरे इंतजार में कब से उदास बैठे हैं,
तेरे दीदार में आँखे बिछाये बैठे हैं,

❣
तू एक नज़र हम को देख ले बस,
इस आस में कब से बेकरार बैठे हैं❣❣❣
ख़ामोश आँखों में
और कितनी वफ़ा रखूँ….तुम को ही चाहूँ….
और तुम्हीं से फासला रखूँ….

तुम बिन ज़िंदगी सूनी सी लगती है;
हर पल अधूरी सी लगती है;
अब तो इन साँसों को अपनी साँसों से जोड़ दे;
क्योंकि अब यह ज़िंदगी कुछ पल की मेहमान सी लगती है।
पढ ना ले मेरा दर्द कोई
अल्फाज़ बदल लेता हूँ मै
अगर आँख मे नमी आये
तो आवाज़ बदल लेता हूँ मै
पलको पर रूका है
समन्दर’ खुमार का,,,,
कितना अजब नशा है
तेरे ‘इंतजार’ का…!!!
पतझड़ को भी तू ,
फुर्सत से देखा कर ऐ दिल ;
हर गिरता पत्ता भी ,
तेरी ही तरह टूटा हुआ है ।








हिम्मत तो इतनी थी कि
समुद्र भी पार कर सकते थे
मजबूर इतना हुए कि
दो बुंद आंसूओं ने डुबा दिया।।।

मोहब्बत कहां पूरी होगी
मेरी खातिर थोड़ा ही सही
बेचैन तो तुझे भी होना पड़ेगा.

आज सावन की भीगी ख़ुशबू ने

तेरी सांसों को भी सुलगाया होगा,

इश्क़ बरसाती उन बूँदों में

मेरा चेहरा नज़र तो आया होगा ।


यूँ तो हर एक दिल में दर्द नया होता है,
बस बयान करने का अंदाज़ जुदा होता है,
कुछ लोग आँखों से दर्द को बहा लेते हैं
और किसी की हँसी में भी दर्द छुपा होता है।
शब्दों से ही दिलों पर राज किया जाता है,
चेहरे का क्या है किसी भी हादसे मे बदल जाता है ।
हमसे बात कीजिये तो जरा एहतियात से…
हम लफ्ज भी सुनते है और लहजे भी…!

मोहब्बत उसको भी तो कहते हैं,
उसके नाम पे सब लिखना,


पर उसका नाम ना लिखना।।
परिंदो को मिलेगी मंज़िल एक दिन,


ये फैले हुए उनके पर बोलते है,
और वही लोग रहते है खामोश अक्सर,

ज़माने में जिनके हुनर बोलते है ..
सुबह उठते ही जिसे देखने का दिल करे…!
हमारी ऐसी मोहब्बत हो तुम ..


तुझसे बिछड़ कर अकेलेपन की हद कर दी,
तेरे बाद जितनी भी मोहब्बत आई रद्द करदी।।
लोग डूबते हैं तो समंदर को दोष देते हैं,
मंजिल न मिले तो मुकद्दर को दोष देते हैं,
खुद तो संभल कर चल नहीं सकते,
जब ठेस लगती है तो पत्थर को दोष देते हैं।
तेरी ख़ामोशी पर
फ़िदा तो हम है ही,
कुछ कह दो तो शायद
फ़ना हो जाएँ !!
मेरी रूह में हिस्सा है तुम्हारा भी बहोत,
मैं अगर तुमसे न मिलता तो अधूरा ही रह जाता।


बारिशों की तन्हाई में दिल अपना कुछ यूँ बहलाते हैं…
कुछ उनका लिखा दोहराते हैं, कुछ अपना लिखा मिटाते हैं…
नशा होता तो कबका उतर जाता,
बस मुझे तलब है तेरी सादगी की।
कभी तुम भी लिखा करों; दो शब्द हमारे लिए….
हमें सिर्फ लिखना नहीं पढ़ना भी अच्छा लगता है..
मेरा इश्क ले गया …..
मेरे खुदा के करीब..!!
तुझे पाने की जिद में …….
मैंने सजदे बढ़ा दिए….!!!!
हर इंन्सान का दिल बुरा नही होता
हर एक इन्सान बुरा नही होता
बुझ जाते है दीये कभी तेल की कमी से….
हर बार कुसूर हवा का नही होता !!!
हल्की हल्की बेवजह सी मुस्कुराहटें और तेरा ज़िक्र …
देखो ना कहीं ये मोहब्बत की आहट तो नहीं …..!!
लुटा तो सबने है,,
नाम लेने की बारी आई तो?
बस ज़िन्दगी का दिया


को
मालुम था कुछ नही होगा हासिल
लेकिन . . .


वो इश्क ही क्या जिसमें खुद को
ना गवायाँ जाए …


अच्छा लगता है कि
तुम पढ़ते हो मुझे
जाहिर नही होने देते
ये अलग बात है ।
बात मुक्कदर पे आ के रुकी है वर्ना,,,
कोई कसर तो न छोड़ी थी तुझे चाहने में ।।
“उसकी याद हमें बेचैन बना जाती हैं,
हर जगह हमें उसकी सूरत नज़र आती हैं,
कैसा हाल किया हैं मेरा आपके प्यार ने,

नींद भी आती हैं तो आँखे

एक उम्र ग़ुज़ारी हैं हमने तुम्हारी ख़ामोशी पढते हुए,
एक उम्र गुज़ार देंगे तुम्हें महसूस करते हुए..


यूँ तो मेरी बस्ती के लोग भी कम हसीन ना थे,
बस दिल में शौक था उसको अपना बनाने का..!!
जिस दिन बंद कर ली हमने आंखे
कई आंखों से उस दिन आंसू बरसेंगे
जो करते है दिल से प्यार हमें
वही हमारी एक शरारत को तरसेंगे!!
उधार मांगा है, उनकी आँखों का काजल अपनी
शायारी के लिए,
शर्त उसने भी रख दी कि शायरी उनकी आँखों पर ही हो….!
इकरार में शब्दों की अहमियत नहीं होती,
दिल के जज़्बात की आवाज़ नहीं होती।
आँखे बयां कर देती है दिल की दास्तान,
मोहब्बत लफ़्ज़ों की मोहताज नहीं होती।
अगर कोई एक लफ्ज मे मेरी हर खुशी पूछे!
तो मै तेरे नाम के सिवा कुछ और ना कहू ।
जिंदगी की राह में मिलेंगे तुम्हे हजारों मुसाफिर,
उम्र भर ना भूल पाओगे वो मुलाकात हूँ मैं….।
मोहब्बत से अब कोसों दूर रखना मुझे ए खुदा….
यूँ बार बार मौत का सामना मेरे बस की बात नहीं


कोई तेरे साथ नहीं तो हम ना कर ,,
खुद से बढ़कर दुनियां में,
कोई हमसफ़र नहीं
मांगा नहीं था खुदा से तुम्हें
इशारा तुम्ही को था


नाम नहीं लिया मैंने
मगर पुकारा तुम्ही को था l
अच्छा ख़ासा बैठे बैठे गुम हो जाता हूँ,
अब मैं अक्सर मैं नहीं रहता, तुम हो जाता हूँ ..
इश्क़ की भी अपनी बचकानी ज़िद है,
चुप कराने को भी वही चाहिए,
जो रुला कर गयी है….


सारे ज़माने को मेरे अल्फ़ाज़ समझ आते हैं,
तुम बताओ.. तुम किस दौर के ज़ाहिल हो..!!
उजड़ी बस्तियों में किसको ढूंढ़ते हो,
बर्बाद लोग अक्सर चाय की दुकान पर मिलते हैं।
“मेरी …बिगडी आदतों में..
शुमार है आज़ भी….
तुम्हें सोचना..
तुमहे चाहना और चाहते रहना..!!!
एक इल्जाम तेरे सर धर चुका हूं मैं,
तुझ पर जो बीत रही हैं,
उससे गुजर चुका है मैं,
इश्क़ किया था हमने भी हम भी रातो को जागे थे,
था कोई जिसके पीछे हम नंगे पांव भागे थे,


अपनी खुशियों का चाबी किसी को ना देना,,
लोग अक्सर दूसरो का सामान खो देते है।।।
हमें सीने से लगाकर हमारी सारी कसक दूर कर दो
हम सिर्फ तुम्हारे हो जाऐ हमें इतना मजबूर कर दो
‘गुफ्तगू’ करते रहिये,
थोड़ी थोड़ी अपने चाहने वालों से…
जाले’ लग जाते हैं,
अक्सर बंद मकानों में..

❣❣

तेरे दीदार में आँखे बिछाये बैठे हैं,



तू एक नज़र हम को देख ले बस,
इस आस में कब से बेकरार बैठे हैं❣❣❣
ख़ामोश आँखों में
और कितनी वफ़ा रखूँ….तुम को ही चाहूँ….
और तुम्हीं से फासला रखूँ….


तुम बिन ज़िंदगी सूनी सी लगती है;
हर पल अधूरी सी लगती है;
अब तो इन साँसों को अपनी साँसों से जोड़ दे;
क्योंकि अब यह ज़िंदगी कुछ पल की मेहमान सी लगती है।
पढ ना ले मेरा दर्द कोई
अल्फाज़ बदल लेता हूँ मै
अगर आँख मे नमी आये
तो आवाज़ बदल लेता हूँ मै
पलको पर रूका है
समन्दर’ खुमार का,,,,
कितना अजब नशा है
तेरे ‘इंतजार’ का…!!!
पतझड़ को भी तू ,
फुर्सत से देखा कर ऐ दिल ;
हर गिरता पत्ता भी ,
तेरी ही तरह टूटा हुआ है ।









हिम्मत तो इतनी थी कि
समुद्र भी पार कर सकते थे
मजबूर इतना हुए कि
दो बुंद आंसूओं ने डुबा दिया।।।
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