बाली और हनुमान भगवान् के बीच में युद्व | कौन जीता ? | Hindi Moral Stories

बाली और हनुमान भगवान् के बीच में युद्व | कौन जीता ?​

बाली और हनुमान भगवान् के बीच में युद्व | कौन जीता ?


हम सब जानते हैं की बाली कौन था। सुग्रीव के भाई, अङ्गद का पिता, अप्सरा तारा का पति और वानर श्रेष्ठ – रिक्ष का पुत्र “बाली” बहुत ही शक्तिशाली था। देवराज इंद्रा का धर्मपुत्र और किष्किन्धा का राजा बाली। उनसे कोई भी लड़ता वो हमेशा हार जाता क्योंकि महाराज इंद्रा से उनको एक स्वर्ण हार मिला था जिसको पहन के लड़ने से सामने वाले की आधी ताक़त उनकी हो जाती थीं। और सामने वाले की हार निश्चित होती थी। इसके वज़ह से वो लगभग अजय थे।

वह सबसे लड़ते और वो जीत जाते। यह सुन के रावण ने उन्हें चुनौती भी दी थी। और ठीक वही हुआ जो हमेशा होता था, रावण का आधी ताकत बाली की हो गयी और बाली ने रावण को अपने कांख में ६ माह तक दबाये रखा। उसके बाद उनकी दोस्ती हो गयी।

ऐसेही एक बार बाली ज़ोर ज़ोर से चिला रहे थे की कोई है जो मुझसे युद्व करे? है कोई?


ये सुन सुन के हनुमान भगवान् (जो राम राम का जाप कर रहे थे) उन्हें ध्यान केंद्रित करने में दिकत हो रहे थी। तब वो बाली के पास गए और बोले प्रभुः आप सबसे ताक़तवर हैं आपसे कोई भी नहीं जीत सकता। तो बाली ने कहा की तुम्हारे भगवान् राम को भी हरा दूंगा बुलाओ उन्हें। ये सब सुन के हनुमान भगवान् को बहुत गुस्सा आया और वो खुद बाली से लड़ने के लिए तैयार हो गए।

दूसरे दिन जब हनुमान भगवान्बाली से लड़ाई करने जा रहे थे तभी ब्रम्हदेव आए और उन्होंने बोला की ये लड़ाई मत करो। हनुमान भगवान् बोले अगर वो मुझे बोलते तो कोई बात न होती लेकिन उन्होंने मेरे भगवान् राम को ललकारा हैं। उसके बाद ब्रम्हदेव ने उन्हें नहीं रोका लेकिन उन्होंने हनुमान जी को बोले की वो अपने पुरे शक्ति के १०% ही साथ ले के जाये और बाकी का ९०% शक्ति वही उनके पास रख दे। उन्होंने वैसा ही किया। और बाली से लड़ने निकल पड़े।

जब वो बाली से लड़ने जा रहे थे तभी बाली को शक्ति मिलने लगी और उनका शरीर ऐसा होने लगा जैसे उनका शरीर फट जाएगी। तभी ब्रम्हदेव आए और उन्होंने बोला की ये लड़ाई मत करो और जिन्दा रहना चाहते हो तो हनुमान से जितना दूर भाग सकते हो भाग जाओ। उन्होंने तो मात्र अपने पुरे शक्ति के १०% ही साथ ले के आ रहे हैं। फिर बाली ने वैसा ही किया और बहुत दूर चले गए।

फिर बाली को समझ आ गया की भगवान् हनुमान कितने शक्तिशाली है परन्तु उतने ही शांत।

कहानी का नैतिक: “आप भले गुणों या ताक़त से भरपूर हो लेकिन दुसरो को कभी भी कम न समझे। और कमजोरों की मदद करे उन्हें परेशान नहीं।”
 
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