Eid Mubarak Shayari In Hindi | ईद मुबारक शायरी

ईद का दिन है गले आज तो मिल ले ज़ालिम
रस्म-ए-दुनिया भी है मौक़ा भी है दस्तूर भी है -क़मर बदायुनी

Eid Ka Din Hai Gale Toh Mil Le Zaalim
Rasm-e-Duniya Bhi Hai Mauka Bhi Hai Dastoor Bhi Hai– Qamar Badayuni

ज़माने भर की ईदों से हमे क्या मतलब,
मेरा चाँद मिल जाये तो मेरी ईद हो जा

Zamane Bhar Ki Idon Se Hamein Kya Matlab
Mera Chand Mil Jaaye Toh Meri Eid Ho Jaaye

मिल के होती थी कभी ईद भी दीवाली भी
अब ये हालत है कि डर डर के गले मिलते हैं

Mil Ke Hoti Thi Kabhi Eid Bhi Deewali Bhi
Ab Ye Halat Hai Ki Dar-Dar Ke Gale Milte Hai

तुझसे बिछड़े तो अब होश नहीं
कब चाँद हुआ कब ईद हुई

Tujhse Bichre Toh Ab Hosh Nahi
Kab Chand Hua Kab Eid Hui

चाँद निकला तो मैं लोगों से लिपट लिपट कर रोया
ग़म के आंसू थे जो खुशियों के बहाने निकले

Chand Nikla Toh Mai Logon Se Lipat-Lipat Kar Roya
Gum Ke Aansu The Jo Khusiyon Ke Bahane Nikle


मासूम से अरमानो की मासूम सी दुनिया
जो कर गए बर्बाद उन्हें ईद मुबारक

Massom Se Armaano Ki Masoom Si Duniya
Jo Kar Gaye Barbaad Unhe Eid Mubarak

ऐ हवा तू ही उसे ईद-मुबारक कहियो
और कहियो कि कोई याद किया करता है -त्रिपुरारि

Ae Hawa Tu Hi Use Eid-Mubarak Kahiyo
Aur Kahiyo Ki Koi Use Yaad Kiya Karta Hai– Tripuraari

ईद का चाँद तुम ने देख लिया
चाँद की ईद हो गई होगी

Eid Ka Chand Tumne Dekh Liya
Chand Ki Eid Ho Gayi Hogi

मेरी तमन्ना तो ना थी तेरे बगैर ईद मनाने की
मगर, मजबूर को मजबूरियां, मजबूर कर देती है

Meri Tamanna Toh Na Thi Tere Bagair Eid Manane Ki
Magar Majboor Ki Majbooriyaan, Majboor Kar Deti Hai

तुझ को मेरी न मुझे तेरी ख़बर जाएगी
ईद अब के भी दबे पाँव गुज़र जाएगी -ज़फ़र इक़बाल

Tujh Ko Meri N Mujhe Teri Khabar Jayegi
Eid Ab Ke Bhi Dabe Paaw Guzar Jayegi – Zafar Iqbal

जो खो गया हम से अंधेरी रातों में
उसी को ढूंढने के लिए ईद आई है

Jo Kho Gaya Hum Se Andheri Raaton Me
Usi Ko Dhoondhne Ke Liye Eid Aayi Hai

जिस तरफ़ तू है उधर होंगी सभी की नज़रें
ईद के चाँद का दीदार बहाना ही सही -अमजद इस्लाम अमजद

Jis Taraf Tu Hai Udhar Hongi Sabhi Ki Nazare
Eid Ke Chand Ka Deedar Bahana Hi Sahi– Ahmad Islaam Amzad

माह-ए-नौ देखने तुम छत पे न जाना हरगिज़
शहर में ईद की तारीख़ बदल जाएगी -जलील निज़ामी

Maah-e-Nau Dekhne Tum Chat Pe N Jaana Hargiz
Shehar Me Eid Ki Taarikh Badal Jayegi– Jaleel Nizaami

ईद आई तुम न आए क्या मज़ा है ईद का
ईद ही तो नाम है इक दूसरे की दीद का

Eid Aayi Tum N Aaye Kya Maza Hai Eid Ka
Eid Hi Toh Naam Hai Ik Dusre Ki Deed Ka

हमने तुझे देखा नहीं क्या ईद मनाएँ
जिसने तुझे देखा हो उसे ईद मुबारक -लियाक़त अली आसिम

Humne Tujhe Dekha Nahi Kya Eid Manaye
Jisne Tujhe Dekha Ho Use Eid Mubarak– Liyakat Ali Aasim

तुझे याद करते है तो ईद मना लेते है
हमने अपने लिए त्यौहार अलग रखा है

Tujhe Yaad Karte Hai Toh Eid Mana Lete Hai
Hamne Apne Liye Tyohaar Alag Rakha Hai

फ़लक पे चाँद सितारे निकलने हैं हर शब
सितम यही है निकलता नहीं हमारा चाँद -पंडित जवाहर नाथ साक़ी

Falak Pe Chand Sitaare Nikalte Hai Har Shab
Sitam Yahi Hai Nikalata Nahi Humara Chand – Pandit Jawahar Nath Saaki

उस से मिलना तो उसे ईद-मुबारक कहना
ये भी कहना कि मिरी ईद मुबारक कर दे -दिलावर अली आज़र

Us Se Milna Toh Use Eid Mubarak Kehna
Ye Bhi Kehna Ki Meri Eid Mubarak Kar De – Dilwar Ali Aazar

देखा हिलाल-ए-ईद तो आया तेरा ख़याल
वो आसमाँ का चाँद है तू मेरा चाँद है

Dekha Hilaal-e-Eid Toh Aaya Tera Khayal
Wo Aasmaan Ka Chand Hai Tu Mera Chand Hai

तेरे कहने पे लगायी है यह मेहँदी मैंने
ईद पर अब न तू आया तो क़यामत होगी

Tere Kehne Pe Lagayi Hai Yeh Mehandi Maine
Eid Par Ab N Tu Aaya Toh Qayamat Hogi

देखा ईद का चाँद तो मांगी ये दुआ रब से
देदे तेरा साथ ईद का तोहफा समझ कर

Dekha Eid Ka Chand Toh Maangi Ye Dua Rab Se
De De Tera Sath Eid Ka Tohafa Samajh Kar

तुझे मेरी ना मुझे तेरी खबर जाएगी
ईद अब के बार दबे पाँव गुजर जाएगी

Tujhe Meri Na Tujhe Teri Khabar Jayegi
Eid Ab Ke Baar Dabe Paaw Guzar Jayegi
 
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