TERI NAFRAT KEH RAHI HAI TUJHE PYAR HAI MUJHSE | GOONJ CHAND | POETRY

TERI NAFRAT KEH RAHI HAI TUJHE PYAR HAI MUJHSE | GOONJ CHAND | POETRY


मेरी बेपनाह मोहब्बत को आज भी इकरार है तुझसे

ओर तेरी नफरत कह रही हैं तुझे प्यार हैं मुझसे

—–

तुझे किस बात का गुरुर हैं जो जाता नहीं

तेरे बिना एक भी लम्हा मैंने काटा नहीं

तुझे हैं बेचैनी तो मेरा इकरार है तुझसे

तेरी नफरत कह रहीं हैं तुझे प्यार हैं मुझसे

—–

तूने मेरे प्यार को कभी समझा नहीं है

मेरे प्यार पर हावी तेरी गलतफहमिया रही हैं

—–

तेरे लिये मैं कुछ भी नहीं

पर मेरा पूरा जहां हैं तुझसे

तेरी नफरत कह रहीं हैं तुझे प्यार हैं मुझसे

—–

कोशिश की थी मैंने कि सुलझा सकूं

कि रिश्तो में पड़ी उन गाठो

—–

पर भुला न सकीं कि अपने गालों पर पड़े उन चाटो को

तू भूल गया शायद पर मेरा दिल भी कही बेजार है तुझसे

तेरी नफरत कह रहीं हैं तुझे प्यार हैं मुझसे

—–

बीत गए कितने साल यही सोचकर

कि तू कभी वापिस आयेगा

ओर तुझे हुई उन गलतफहमियों की माफी मांग मुझे

मनाएगा पर तुझे आज भी हैं गलतफहमिया

—–

ओर मेरा हर विश्वास हैं तुझसे

तेरी नफरत कह रहीं हैं तुझे प्यार हैं मुझसे
 

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