हदीस क्या है?


हदीस क्या है?


हदीस क्या है? अगर आप नहीं जानते हैं तो इस पोस्ट को ध्यान से जरूर पढ़िए। इसी बात की जानकारी यहाँ दी जा रही है। अल्लाह के रसूल मुहम्मद सल्ललौ अलैहि वसल्लम के नबूअत से लेकर विसाल तक आपने जो कुछ कहा, किया, या आपके सामने जो कुछ हुआ और आपने उससे रजामंदी की या मना नहीं किया ये सारी बातें जिन किताबों में दर्ज की गईं वही हदीस हैं।

क़ुरान पाक के बाद इस्लाम धर्म सबसे पवित्र और खास किताब हदीस ही है। क़ुरान आसमानी किताब है। जिसकी आयतें अल्लाह ने वह्य के जरिये अपने रसूल मुहम्मद सल्ललौ अलैहि वसल्लम के पास भेजा। क़ुरान अल्लाह तआला के हुक्मों का कलेक्शन है जिसमें बताया गया है की अल्लाह का बन्दों को किस तरीके से जिंदगी गुजारना चाहिए।

लेकिन अल्लाह के इन हुक्मों के करने का तरीका क़ुरान में नहीं है। जैसे कि क़ुरान में नमाज अदा करने का हुक्म तो है लेकिंग कब कैसे कितनी नमाज पढ़ी जाये इसका डिटेल नहीं है। नमाज की तफ्सील हदीस में ही मिलती है।

इसी तरह रोजा, ज़कात, हज का हुक़्म क़ुरान में मौजूद है लेकिन तफ्सील नहीं है। इन हुक्मों के तामील का तरीका हदीस में मिलता है। क़ुरान को समझने के लिए हदीस का जानना बहुत जरुरी है।


हदीस के प्रकार​

कथन के हिसाब से हदीस 2 प्रकार के हैं –
  1. हदीस नबवी – हज़रत मुहम्मद सल्ललौ अलैहि वसल्लम ने जो कुछ कहा वो हदीस नबवी है।
  2. हदीस क़ुदसि – अल्लाह तआला ने जो कुछ कहा वो हदीस क़ुदसि है।

हदीस की किताबें​

हदीस की कुछ खास किताबें ये हैं –

सहीह बुख़ारी

सहीह मुस्लिम

अबू दाऊद

इब्ने माजा

तिर्मिज़ी

कुछ खास हदीसें​

  1. हज़रत अबू हुरैरह रजिअल्लाहु अन्हो फरमाते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया – दुनिया मोमिन के लिए क़ैदख़ाना है और काफिर के लिए जन्नत है।
  2. हज़रत उमर रजिअल्लाहु अन्हो फरमाते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया – नमाज दीन का सुतून है।
  3. हज़रत अनस रजिअल्लाहु अन्हो फरमाते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया – मेरी आँखों की ठंढक नमाज में रखी गई है।
  4. हज़रत अबूदर्दा रजिअल्लाहु अन्हो फरमाते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया – क़यामत के दिन मोमिन के तराजू में अच्छे अख़लाक़ से ज्यादा भारी कोई चीज नहीं होगी।
  5. हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रजिअल्लाहु अन्हो से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया – अल्लाह तआला की रहमत हो उस बन्दे पर जो बेचने, खरीदने, और अपने हक़ का तकाजा करने में नरमी अख्तियार करे।
  6. हज़रत मुआज बिन जबल रजिअल्लाहु अन्हो फारमाते हैं कि मैंने रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम को यह इरशाद फ़रमाते हुए सुना – जो शख़्स अल्लाह त आला से इस हाल में मिले कि वह उनके साथ किसी को शरीक नहीं करता हो, पांचों वक़्त की नमाज पढ़ता हो और रमज़ान के रोजे रखता हो तो उसकी मगफिरत कर दी जाएगी।
  7. अल्लाह तआला का इरशाद है – जो लोग इमान लाये और उन्होंने अपने ईमान में शिर्क की मिलावट नहीं की, अम्न इन्ही के लिए है और यही लोग हिदायत पर हैं।
  8. अल्लाह तआला ने अपने रसूल सल्लाहु अलैहि वसल्लम से इरशाद फ़रमाया – आप अपने रब के रास्ते की तरफ हिकमत और अच्छी नसीहत के जरिये दावत दीजिये।
  9. हज़रत अबू मूसा अशअरी रजिअल्लाहु अन्हो फारमाते हैं कि नबी करीम सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया – भूखे को खाना खिलाओ, बीमार की इयादत करो और (बेगुनाहगार) कैदी को रिहाई दिलाने को कोशिश करो।
  10. हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रजिअल्लाहु अन्हो से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया – जमाअत की नमाज अकेले की नमाज से अज्र व सवाब में सत्ताईस दर्जे ज्यादा होती है।
  11. हज़रत सद्दाद बिन औस रजि. से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया – समझदार आदमी वो है जो अपने नफ़्स का मुहासबा करता रहे और मौत के बाद की जिंदगी के लिए अमल करे। नासमझ है वो आदमी जो नफ़्स की ख्वाहिशों पर चले और अल्लाह तआला से उम्मीद रखे कि अल्लाह तआला बड़े माफ़ करने वाले हैं।
अल्लाह तआला अपने बन्दों से बेहद मुहब्बत करता है। वो चाहता है की उसका हर बंदा क़ुरान और हदीस की रोशनी में जिंदगी जिए और जन्नत का हक़दार बने। इसीलिए उसने मुहम्मद सल्ललाहु अलैहि वसल्लम को रसूल बनाकर हम सब की हिदायत, नसीहत के लिए भेजा।

अब आपकी बारी है कि आप क़ुरान हदीस के मुताबिक जिंदगी जी कर अपना आखरत बनाते हैं कि नहीं।

इस पोस्ट में आपने जाना कि हदीस क्या है? अगर आपको अपने मजहबे इस्लाम की जानकारी नहीं है तो इल्म सीखें, जानकारी हासिल करें, उस पर अमल करें, साथ ही दुसरो तक भी दीनी जानकरी पहुंचाए। इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा अल्लाह के मोमिन बन्दों के साथ शेयर कीजिये और सवाब हासिल कीजिये।

अल्लाह तआला कहने सुनने से ज्यादा अमल की तौफीक आता फरमाए, आमीन।
 
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